लेकिन ममदानी के लिए अपने वादों पर खरा उतरना आसान नहीं होगा। न्यूयॉर्क शहर का बजट इतना नहीं है कि वे इससे अपने सभी वादों को पूरा कर सकें। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार यानी डोनाल्ड ट्रंप पर निर्भर रहना होगा। लेकिन ममदानी को एक संकट बता चुके ट्रंप उनकी कोई मदद करेंगे, इसकी संभावना कम ही है। चुनाव के दौरान ही उन्होंने धमकी दी थी कि यदि ममदानी मेयर बनते हैं तो वे न्यूयॉर्क शहर का बजट रोक देंगे। वैसे भी पहले ही अमेरिकी कांग्रेस से बजट पास न कराने के कारण पूरे देश में शटडाउन लागू करने के लिए मजबूर हुए ट्रंप के पास अतिरिक्त बजट की संभावना बहुत कम ही है।
अपने वादों को पूरा करने के लिए ममदानी के पास अमीरों पर कर बढ़ाने का एक विकल्प है। अमेरिका में भी केंद्र सरकार ही कर एकत्र करती है। शहरी व्यवस्था को चलाने के लिए टैक्स बढ़ाने के उनके विकल्प पूरी तरह खत्म तो नहीं हैं, लेकिन उनके विकल्प सीमित अवश्य हैं। लेकिन इससे वे कितना फंड एकत्र कर पाएंगे, यह कहना मुश्किल है।
कहां से आएगा पैसा
ममदानी की सबसे बड़ी चुनौती मुफ्त आवास बनाने की होगी। दो लाख मकान बनाने में भारी धनराशि खर्च होगी और यह खर्च ममदानी कहां से जुटाएंगे, इस पर चर्चाएं तेज हैं। ममदानी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ही यह कहा था कि यह अतिरिक्त पैसा धनी और कॉर्पोरेट घरानों पर टैक्स बढ़ाकर किया जाएगा। वे एक मिलियन डॉलर प्रति वर्ष से अधिक कमाने वालों पर 20 हजार डॉलर का टैक्स बढ़ाना चाहते हैं। इसी तरह रजिस्ट्री और अन्य तरीकों पर टैक्स बढ़ाकर वे इस बढ़े खर्च को पूरा करने का प्लान रखते हैं, लेकिन आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह करना मुश्किल होगा क्योंकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था पहले ही दबाव में है।
अव्यवस्था की ओर बढ़ सकता है न्यूयॉर्क- विशेषज्ञ
दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. राजकुमार फलवारिया ने अमर उजाला से कहा कि जोहरान ममदानी ने चुनाव जीतने के लिए न्यूयॉर्क शहर के पूरे बजट से कई गुना अधिक की घोषणाएं कर दी हैं। इससे वे अरविंद केजरीवाल के मॉडल पर चुनाव जीत तो गए हैं, लेकिन उनका अंत भी केजरीवाल की तरह ही हो सकता है क्योंकि वे अपने वादों को पूरा कर पाएंगे, इसकी संभावना बहुत कम है। न्यूयॉर्क का बजट बढ़ाने की उनकी सीमाएं भी बहुत सीमित हैं। जबकि उनकी घोषणाओं के कारण लोग अब उनसे जल्द से जल्द मुफ्त बस सफर और नए घरों की मांग करेंगे। इसके पूरा न हो पाने पर न्यूयॉर्क में उसी तरह की अव्यवस्था देखने को मिल सकती है जिस तरह पूर्व में एक बार कैपिटल हिल पर देखी जा चुकी है।
डॉ. राजकुमार फलवारिया ने कहा कि अमेरिका इस समय तेज महंगाई के दौर से गुजर रहा है। लोगों को अपना घर चलाना मुश्किल हो रहा है। इस समय अमेरिका में शटडाउन भी चल रहा है जिसके कारण वहां लाखों लोगों को बेरोजगारी के संकट से गुजरना पड़ रहा है। ऐसे में ममदानी के पास टैक्स दरें बढ़ाने का भी बहुत अधिक विकल्प नहीं है। ऐसे में बजट की कमी के कारण उन्हें अपनी योजनाओं को पूरा करने में बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। डॉ. फलवारिया के अनुसार, मुफ्त योजनाओं के वादे के पूरा न हो पाने की स्थिति में वे उसी तरह अलोकप्रिय हो जाएंगे जिस तरह अरविंद केजरीवाल हो गए थे। इससे उनकी राजनीतिक पारी भी खतरे में पड़ सकती है।