इंसानों का मस्तिस्क (सांकेतिक)
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वैज्ञानिकों को इन्सानी मस्तिष्क में भी माइक्रोप्लास्टिक के सबूत मिले हैं। इससे पहले वैज्ञानिकों को इन्सानी रक्त, नसों, फेफड़ों, गर्भनाल, लिवर, किडनी, अस्थि मज्जा, प्रजनन अंगों, घुटने और कोहनी के जोड़ों के साथ अन्य अंगों में भी इनकी मौजूदगी के सबूत मिल चुके हैं। अब दिमाग के साथ इन्सानी दूध, सीमन और यूरिन में भी माइक्रोप्लास्टिक की पुष्टि हुई है।
इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू मैक्सिको, ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी, न्यू मैक्सिको ऑफिस ऑफ द मेडिकल इन्वेस्टिगेटर से जुड़े शोधकर्ताओं की ओर से किया अध्ययन अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की ओर से साझा किया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अन्य अंगों की तुलना में मस्तिष्क के ऊतकों में 20 गुना अधिक प्लास्टिक पाया गया है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह रही कि डिमेंशिया से जूझते लोगों के दिमाग में स्वस्थ लोगों की तुलना में कहीं अधिक प्लास्टिक पाया गया है।
लगातार बढ़ती जा रही खतरनाक कणों की मात्रा
शोधकर्ताओं ने 2016 और 2024 के बीच उपलब्ध नमूनों की जांच की है। 2016 में जो नमूने एकत्र किए गए थे उनमें से 17 पुरुषों के, जबकि 10 महिलाओं के थे। वहीं, 2024 में पुरुषों से 13 और 11 नमूने महिलाओं से जुड़े थे। 2024 में एकत्र किए गए मस्तिष्क के नमूनों में 2016 की तुलना में अधिक प्लास्टिक पाया गया। 2016 में लिए नमूनों की तुलना में 2024 में मस्तिष्क में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा करीब 50 फीसदी अधिक थी। यानी समय के साथ मस्तिष्क में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बढ़ रही है।
- मस्तिष्क के 91 नमूनों में अन्य अंगों की तुलना में औसतन 10 से 20 गुना माइक्रोप्लास्टिक अधिक था। इसी तरह 2024 की शुरुआत में मस्तिष्क के 24 नमूनों में उनके वजन के हिसाब से औसतन 0.5 फीसदी प्लास्टिक मौजूद था।
पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य के लिए भी बड़ी चुनौती
माइक्रोप्लास्टिक शरीर में कोशिकाओं की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है। प्लास्टिक के यह कण इन्सानी स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन चुके हैं।
- दुनिया में शायद ही ऐसी कोई जगह बची है जहां माइक्रोप्लास्टिक्स के कण मौजूद न हों। निर्जन अंटार्कटिका भी इनकी मौजूदगी से अछूता नहीं रह गया है।