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अमेरिका की मध्यस्थता: इस्राइल-लेबनान युद्धविराम पर सहमत, हिज्बुल्लाह को पीछे हचाना प्रमुख शर्तों में शामिल

Thu, 04 Jun 2026 04:30 PM IST
Sandhya Kumari न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान युद्धविराम लागू करने पर सहमत हुए हैं। दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, सीधे संवाद जारी रखने और दक्षिणी लेबनान में गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को रोकने का संकल्प लिया है। 

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बेंजामिन नेतन्याहू, इस्राइली प्रधानमंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिका की मध्यस्थता में वॉशिंगटन में दो दिनों तक चली वार्ता के बाद इस्राइल और लेबनान युद्धविराम लागू करने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों ने भविष्य में भी सीधे संवाद जारी रखने और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।

यह समझौता 2 और 3 जून को अमेरिकी विदेश विभाग में आयोजित चौथी उच्चस्तरीय त्रिपक्षीय बैठक के बाद सामने आया। इस बैठक में अमेरिका, इस्राइल और लेबनान के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अमेरिकी विदेश विभाग के काउंसलर डैन हॉलर ने कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में हुई बातचीत के परिणामस्वरूप दोनों देशों ने युद्धविराम लागू करने पर सहमति बनाई है।

हिज्बुल्लाह को पूरी तरह गोलीबारी बंद करनी होगी

संयुक्त बयान के अनुसार, युद्धविराम की प्रमुख शर्त यह है कि हिज्बुल्लाह पूरी तरह से गोलीबारी बंद करेगा और उसके सभी लड़ाके दक्षिण लिटानी क्षेत्र से हटेंगे। समझौते के तहत कुछ पायलट जोन भी स्थापित किए जाएंगे। इन क्षेत्रों में लेबनान की सेना पूरी तरह नियंत्रण संभालेगी और किसी भी गैर-सरकारी सशस्त्र समूह की मौजूदगी नहीं होगी।

भविष्य में इस्राइल और लेबनान के संबंध सरकारें तय कर

डैन हॉलर ने कहा कि दोनों पक्षों ने अमेरिका के मार्गदर्शन में इन क्षेत्रों की स्थापना पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह कदम भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापक शांति और सुरक्षा समझौते का आधार बन सकता है। तीनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इस्राइल और लेबनान के भविष्य के संबंध उनकी अपनी संप्रभु सरकारों द्वारा तय किए जाने चाहिए। किसी बाहरी देश या गैर-सरकारी संगठन को इसमें हस्तक्षेप की अनुमति नहीं होनी चाहिए।

इस्राइल और लेबनान दोनों संबंधो को सुधारने में काम करेंगे

इस्राइल और लेबनान ने अपने बयान में कहा कि उनके बीच दुश्मनी बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। दोनों पक्ष विश्वास लाने, विवादों के समाधान और स्थायी समझौते की दिशा में बातचीत जारी रखेंगे। बैठक में एक नए सुरक्षा ढांचे पर भी चर्चा हुई। यह ढांचा 29 मई को पेंटागन में हुई वार्ता पर आधारित है। इसका उद्देश्य दोनों देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना है। इस सुरक्षा व्यवस्था में गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों की गतिविधियों को समाप्त करना और उनकी वापसी रोकना भी शामिल है।

अमेरिका हिज्बुल्लाह को गंभीर चुनौती मानता है

अमेरिका ने लेबनान की सेना को सहयोग जारी रखने का भरोसा दिया है। इसका उद्देश्य पूरे देश में सरकारी नियंत्रण को मजबूत करना है। डैन हॉलर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया बयान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका हिज्बुल्लाह को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानता है।

इस्राइल ने याद दिलाया कि उसकी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब हिज्बुल्लाह को पूरी तरह निरस्त्र किया जाए और उसका ढांचा समाप्त किया जाए। वहीं, लेबनान ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के सम्मान और अपनी पूर्ण संप्रभुता के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध है। लेबनान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के सहयोग से अपनी सेना की क्षमता को और मजबूत करेगा, ताकि पूरे देश में प्रभावी प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

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