अमेरिकी सीनेटरों ने ईरान के चाबहार बंदरगाह के विकास की भारत की योजना पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि व्यापार के विस्तार के लिए की जा रही इस कोशिश के जरिए भारत कहीं अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशासन इस परियोजना की बारीकी से पड़ताल करेगा।
अमेरिका की दक्षिण और मध्य एशिया मामलों की प्रभारी सहायक निशा देसाई बिस्वाल ने मंगलवार को कहा कि, 'ईरान के संबंध में प्रतिबंध के बावजूद भारतीयों की ओर से गतिविधियां जारी रखने को लेकर हम बेहद स्पष्ट हैं।' उन्होंने कहा कि हमें चाबहार के बारे में की गई घोषणा का पड़ताल करते हुए यह देखना होगा कि यह पूरी तरह से सही है या नहीं।
अमेरिका और यूरोप ने जनवरी में एक समझौते के तहत इस शर्त के साथ ईरान पर से प्रतिबंध हटाए थे कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करेगा। लेकिन व्यापार से जुड़े कुछ प्रतिबंध ईरान पर अभी भी कायम हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान यात्रा के दौरान भारत और ईरान के बीच एक दर्जन समझौते किए गए थे जिसमें रणनीतिक चाबहार बंदरगाह के विकास, एक एल्युमीनियम संयंत्र की स्थापना और एक रेल लाइन बिछाने का करार भी है। प्रस्तावित रेल लाइन के जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने का एक नया रास्ता मिलेगा। परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर इस समझौते के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे 'क्षेत्र के इतिहास की धारा बदल सकती है।'
बिस्वाल ने कहा कि भारत के लिए ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया का द्वार खोलता हैं। यह भारत को नए व्यापार के रास्ते उपलब्ध कराता है जो कि अभी उसके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत के ईरान के साथ सैन्य सहयोग जैसे किसी रिश्ते के संकेत अभी तक नहीं मिले हैं जो कि निश्चित रूप से चिंता का विषय बन सकते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगले माह अमेरिका के दौरे पर रवाना होंगे जहां उन्हें अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करना है।