फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

India-US: 'दोनों देशों के साझा हितों पर टिका', भारत-अमेरिका रिश्तों पर बोले कोल्बी; जयशंकर की तारीफ भी की

Tue, 24 Mar 2026 06:04 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम एशिया तनाव के बीच अमेरिकी युद्ध नीति उप सचिव एल्ब्रिज कोल्बी के भारत दौरे ने रणनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इसी क्रम में मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज की विदेश नीति नतीजों पर आधारित और लचीली होनी चाहिए। इस दौरान उन्होंने एस जयशंकर की सोच का समर्थन भी किया। 

विज्ञापन
एल्ब्रिज कोल्बी, अमेरिकी युद्ध नीति उप सचिव - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारत दौरे पर आएं अमेरिकी युद्ध नीति उप सचिव एल्ब्रिज कोल्बी ने दिल्ली में आयोजित एक विशेष सत्र में भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में विदेश नीति व्यावहारिक होनी चाहिए और उसका फोकस नतीजों पर होना चाहिए। उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की बात का जिक्र करते हुए कहा कि आज के हालात में देशों को लचीली और परिस्थिति के हिसाब से रणनीति अपनानी चाहिए।

कोल्बी ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह केवल औपचारिकताओं पर आधारित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के साझा हितों पर टिका है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के रिश्तों को विशेष संबंध बताया था।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- LPG Crisis: 'एलपीजी की डिलिवरी सामान्य, पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के निर्देश', पश्चिम एशिया संकट के बीच बोली सरकार

एल्ब्रिज कोल्बी ने भारत की विदेश नीति की तारीफ की
एल्ब्रिज कोल्बी ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की भारत फर्स्ट और इंडिया वे नीति की तारीफ की। कोल्बी ने कहा कि यह सोच अमेरिका की अमेरिका फर्स्ट नीति से मिलती-जुलती है। उन्होंने आसान शब्दों में समझाते हुए कहा कि-

  • भारत फर्स्ट का मतलब है कि भारत अपनी विदेश नीति में सबसे पहले अपने राष्ट्रीय हितों को रखता है।

  • इंडिया वे का मतलब है कि भारत अपने फैसले व्यावहारिक सोच और वास्तविक हालात को ध्यान में रखकर लेता है।

कोल्बी के अनुसार, जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया है कि विदेश नीति भावनाओं से नहीं, बल्कि ठोस और यथार्थवादी सोच से चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में देशों को अपने हितों को स्पष्ट रूप से समझकर फैसले लेने चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि जयशंकर का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव भू-राजनीति और ताकत के संतुलन पर टिकी होती है। इसलिए किसी भी देश को अपनी नीति बनाते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। कोल्बी ने कहा कि भारत ने तब बेहतर तरीके से प्रगति की है, जब उसने वैश्विक हालात का सही आकलन किया और उसी के अनुसार अपने फैसले लिए। उन्होंने कहा कि जयशंकर ने भारत की विदेश नीति की निष्पक्ष और सख्त समीक्षा (ऑडिट) की जरूरत बताई है, ताकि बदलती दुनिया के हिसाब से रणनीति को और मजबूत बनाया जा सके।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत का कदम: स्वदेशी जहाज तैयार करने पर खर्च होंगे 70,000 करोड़ रुपये, पीएम का एलान

भारत-अमेरिका के मजबूत रिश्तों पर कोल्बी का जोर
भारत अमेरिका के मजबूत रिश्तों को लेकर कोल्बी ने कहा कि भारत और अमेरिका को हर मुद्दे पर सहमत होना जरूरी नहीं है। कोल्बी ने कहा कि सबसे जरूरी यह है कि दोनों देशों के हित और लक्ष्य बड़े मुद्दों पर एक जैसे होते जा रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि मतभेद होने के बावजूद रणनीतिक सहयोग मजबूत किया जा सकता है। दोनों देशों के रिश्ते दिखावे पर नहीं, बल्कि लंबे समय के साझा हितों पर आधारित हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि भारत-प्रशांत क्षेत्र में कोई एक देश हावी न हो। साथ ही, दोनों देश खुला व्यापार और अपनी-अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के पक्ष में हैं।
विज्ञापन


विदेश मंत्री जयशंकर की नीति की तारीफ
इस दौरान कोल्बी ने एस जयशंकर की सोच की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रवाद और व्यावहारिक विदेश नीति की अहमियत को सही तरीके से रखा है। उनके कहा कि भारत एशिया में स्थिर संतुलन बनाने को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रहा है। कोल्बी ने जोर दिया कि यह सोच अमेरिका के दृष्टिकोण से भी मेल खाती है। उन्होंने कहा कि दोनों देश मानते हैं कि हर देश को अपने हितों की रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने का अधिकार है।

एशिया में संतुलन और सहयोग
कोल्बी ने कहा कि:

  • भारत और अमेरिका दोनों एशिया में स्थिर और संतुलित शक्ति व्यवस्था चाहते हैं।
  • जब अमेरिका अपने लोगों की सुरक्षा और समृद्धि के लिए काम करता है और भारत अपने नागरिकों के लिए, तो दोनों के प्रयास एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।
  • दोनों देशों को हर मुद्दे पर पूरी सहमति की जरूरत नहीं है, बल्कि जहां जरूरी हो वहां सहयोग करना ही अहम है।
  • भारत-अमेरिका साझेदारी मजबूत है और आगे भी साझा हितों के आधार पर और गहरी होती रहेगी।

अन्य वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें