नासा के एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री जेरी लिनेगर का कहना है कि चंद्रयान-2 ऐसा मिशन है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं। हर कोई उत्साहित है। हम अपनी-अपनी सीटों पर जमे हुए हैं। जेरी ने रूसी अंतरिक्ष स्टेशन मीर से उड़ान भरी थी। इसे धरती की निचली कक्षा के 1986 से 2001 के बीच पांच माह तक चक्कर लगाए थे। जेरी नेशनल ज्योग्राफिक चैनल के साथ चंद्रयान-2 के सीधे प्रसारण के लिए भारत आए हुए हैं।
जेरी ने कहा, हम उम्मीद कर रहे हैं कि चंद्रमिशन को शायद चंद्रमा पर जमा हुआ पानी या झील मिल जाए। इससे अमेरिका की 2024 में चांद पर मानव भेजने की योजना की उम्मीद बढ़ जाएगी। अगर ऐसा होता है तो अमेरिका भी पानी के पास ही अपने यान को उतारने का लक्ष्य बनाएगा। दरअसल, इस मिशन से न सिर्फ भारत की विज्ञान और तकनीक को उन्नत बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि अंतरिक्ष में अन्वेषण करने वाले देशों को चांद पर जडे़ जमाने में मदद मिल सकेगी। जेरी 14 साल के थे, जब अमेरिका ने चांद पर अपोलो मिशन भेजा था। उन्होंने कहा, पूरी दुनिया जब अपोलो मिशन के 50वीं सालगिरह मना रही है ऐसे में हम फिर चांद पर जल्द ही दमदार वापसी करने की योजना बना रहे हैं।
चंद्रयान-1 ने दिए थे पानी होने के संकेत
सितंबर 2009 में नासा ने एलान किया था कि चंद्रयान-1 के आंकड़ों से चंद्रमा पर बर्फ होने के सुबूत पाए गए हैं। कई और अंतरिक्ष मिशनों के बारे में भी कहा गया है कि उन्होंने चांद पर पानी होने के संकेत दिए हैं। नासा ने नवंबर 2009 में घोषणा की थी कि नासा के लूनर क्रेटर ऑब्जर्वेशन एंड सेंसिंग सैटेलाइट ने चंद्रमा के दक्षिणी हिस्से में पानी की मात्रा के संकेत दिए हैं। 22 अक्तूबर, 2008 में चंद्रयान-2 चांद का चक्कर लगाने पहुंचा था। उसने अगस्त 2009 तक चांद के बारे में अहम जानकारियां भेजी थीं।
तमिलनाडु के मंदिर में पूजा-अर्चना
विक्रम के चांद की सतह पर कामयाबी के साथ उतरने के लिए तमिलनाडु के तंजावुर जिला स्थित चंद्रनार मंदिर में विशेष प्रार्थना की गई। चंद्रनार श्रीकैलाशनाथन मंदिर के प्रबंधक वी. कन्नन ने कहा, हमने चंद्रमा के दिव्य आशीर्वाद के लिए शुक्रवार शाम विशेष अभिषेक और अर्चना की। 2008 में चंद्रयान-1 मिशन की सफलता के लिए भी एक विशेष पूजा आयोजित की गई थी।