खालिद ने क्यों खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा?
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सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका में रहने वाले खालिद जहांगीर काजी की उस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर जाकर अपनी बहन के परिवार की शादी में शामिल होने की अनुमति मांगी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई की। काजी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पराग त्रिपाठी ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शादी में शामिल होना है और वह अपनी उम्र को देखते हुए परिवार से मिलना चाहते हैं।
काजी को जम्मू-कश्मीर जाने की अनुमति क्यों चाहिए?
काजी ने अपनी याचिका में जम्मू-कश्मीर जाने की अनुमति मांगी है। उनके वकील ने अदालत को बताया कि काजी चिकित्सक हैं और पहले भी भारत आ चुके हैं। उनकी उम्र 82 वर्ष है और उनके रिश्तेदार भी उम्रदराज हैं। इसलिए प्रस्तावित यात्रा उनके लिए कश्मीर में परिवार के सदस्यों से मिलने का आखिरी अवसर हो सकती है। वकील ने यह भी कहा कि काजी यह लिखित आश्वासन देने को तैयार हैं कि भारत में रहने के दौरान वह किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।
सरकार ने काजी का ओसीआई कार्ड क्यों रद्द किया था?
काजी का ओसीआई कार्ड सरकार ने मई 2023 में रद्द कर दिया था। उन पर ‘पाकिस्तान समर्थक प्रचार’ में शामिल होने और कश्मीरी अलगाववादियों के प्रति सहानुभूति रखने के आरोप लगाए गए थे। सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई को भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े कारणों से जोड़ा था। इसके साथ ही उन्हें विदेशी अधिनियम के तहत ब्लैकलिस्ट भी किया गया था। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने भी उन पर पाकिस्तान समर्थक प्रचार में शामिल होने का आरोप लगाया था।
पहले ओसीआई कार्ड रद्द करने के फैसले पर क्या हुआ था?
काजी के ओसीआई दर्जे को रद्द किए जाने के मामले में पहले भी अदालत में सुनवाई हो चुकी है। नवंबर 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने उनका ओसीआई कार्ड रद्द करने का फैसला निरस्त कर दिया था। अदालत ने कहा था कि कार्रवाई से पहले काजी को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। केंद्र ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की खंडपीठ में अपील की है, जो अभी लंबित है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट काजी की भारत आने की अनुमति मांगने वाली याचिका खारिज कर चुका है।
सुप्रीम कोर्ट ने अब क्या आदेश दिया है?
सुनवाई के दौरान काजी की ओर से तत्काल फैसला देने की मांग की गई, क्योंकि देरी होने पर वह शादी में शामिल होने से चूक सकते हैं। इस पर पीठ ने कहा कि पहले केंद्र का पक्ष सुनना जरूरी है। अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने यह भी कहा कि परिवार उनके पहुंचने पर कोई दूसरा समारोह आयोजित कर सकता है।