गारसेटी ने साबरमती आश्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, एक राजदूत के रूप में मेरा लक्ष्य आज से पांच साल और 20 साल आगे की सोचना है। अमेरिकी राष्ट्रपति भी इस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गारसेटी ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत अर्थव्यवस्थाओं और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र की साझा इच्छा पर आधारित हैं और किसी भी चुनौती में दोनों साथ खड़े हैं। गारसेटी ने अमेरिका में पढ़ने के इच्छुक छात्रों के वीजा बैकलॉग पर भी बात की और आश्वस्त किया कि जल्द ही प्रतीक्षा अवधि को और घटाया जाएगा।
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पहली बार गुजरात यात्रा पर पहुंचे गारसेटी ने साबरमती आश्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, एक राजदूत के रूप में मेरा लक्ष्य आज से पांच साल और 20 साल आगे की सोचना है। अमेरिकी राष्ट्रपति भी इस पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। वह चाहते हैं कि हम न केवल छात्रों के लिए वीजा प्रतीक्षा अवधि घटाएं, बल्कि पहली बार आने वाले विजिटर और अन्य लोगों पर भी ध्यान दें। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में प्रतीक्षा समय दिसंबर की तुलना में 60 प्रतिशत घटा है। आने वाले समय में यह और कम होगा।
19 साल की उम्र से महात्मा गांधी के लेखों को पढ़ रहा हूं
साबरमती आश्रम के बारे में उन्होंने कहा कि यह स्थान न केवल भारतीय इतिहास के लिए बल्कि मानवता के इतिहास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत के साथ अपने जुड़ाव को साझा करते हुए गारसेटी ने कहा कि वह पहली बार 14 साल की उम्र में भारत आए थे। 19 साल की उम्र में एक यूनिवर्सिटी छात्र के रूप में उन्होंने महात्मा गांधी के लेखों को पढ़ना शुरू किया। वह कहते हैं कि महात्मा गांधी की शिक्षा न केवल दुनिया को बदलने, बल्कि हमारे दिलों को छूने की क्षमता रखती है।