भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि क्वाड वास्तव में शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक, न्यायसंगत, खुले और जवाबदेह इंडो-पैसिफिक के साझा हितों को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि भारत कई मायनों में क्वाड का नेतृत्व कर रहा है। बता दें, क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि क्वाड ने पिछले कुछ वर्षों में भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित की है। साथ ही संगठन ने कई व्यापक उद्देश्यों कों पूरा करने की पहल की है। हालांकि, चीन को लगता है कि क्वाड उसके मनसूबों को रोकने के लिए है।
हम इन क्षेत्रों में साथ काम करते हैं
अमेरिकी राजदूत गार्सेटी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस, ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन और भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव के साथ मंच साझा किया। गार्सेटी ने मजाकिया अंदाज में कार्यक्रम के पैनलिस्टों को क्वॉक्स (क्वाड+ऑक्स) बताया। बता दें, ऑकस ऑस्ट्रलिया, ब्रिटेन और अमेरिका का एक समूह है। गार्सेटी ने कहा कि अमेरिका ने हमेशा कहा है कि क्वाड चार देशों का गठबंधन नहीं है। यह हमारा मजबूत द्विपक्षीय संबंध है। क्वाड के प्रत्येक पहलू-प्रत्येक देश के लिए है। हम एक साथ रणनीतिक और सैन्य क्षेत्र में काम करते हैं। हम एक साथ आर्थिक क्षेत्र में काम करते हैं। हम सांस्कृतिक एवं शैक्षिक स्थानों पर काम कर रहे हैं।
भारत अपने रास्ते के लिए नए तरीके खोज रहा है
कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ग्रीन ने कहा कि ऑकस ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता है। वैश्विक मामलों में अपने लिए रास्ता खोजना भारत का लंबा इतिहास है। भारत अपना रास्ता बनाने के लिए नए तरीके खोज रहा है। यह भारत को तय करना है कि उसे किसके साथ साझेदारी करना है। रही बात क्वाड की, तो क्वाड ऐसे क्षेत्र से निपटने की कोशिश करता है, जहां विवाद है। जहां लोकतंत्र खतरे में है। जो देश अपनी संप्रभुता को आगे बढ़ाने में अमसर्थ हैं।