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तमिलनाडु में घमासान: करुणानिधि-स्टालिन पर विजय की टिप्पणी को लेकर सड़क पर उतरी डीएमके, कहा- एक दिन होगा हिसाब

सार

तमिलनाडु में डीएमके ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टिप्पणियों के खिलाफ पूरे राज्य में प्रदर्शन किया। पार्टी नेता पीके शेखर बाबू ने स्टालिन और करुणानिधि पर की गई टिप्पणियों की निंदा की। उन्होंने विजय के भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों को खारिज किया। आईए जानते हैं उन्होंने और क्या कहा? 
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एम के स्टालिन, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने शनिवार को पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की निंदा करते हुए उन पर पार्टी के दिवंगत नेता एम. करुणानिधि और पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया।

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वरिष्ठ नेता पीके शेखर बाबू ने क्या कहा? 
यहां विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ नेता पीके शेखर बाबू ने स्टालिन की 'कुर्बानियों, व्यक्तित्व और मानवीय स्वभाव' के लिए तारीफ की और उन्हें 'मिस्टर क्लीन' बताते हुए कहा कि वे नैतिकता और मूल्यों का पालन करते हैं।



उन्होंने कहा कि विधानसभा में डीएमके के नेतृत्व वाली सरकार ने ऐसे बेदाग नेता को निशाना बनाया। डीएमके ने कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार के उन दावों पर आपत्ति जताई जिनमें इमरजेंसी (1975-77) के दौरान स्टालिन की जेल की सजा का जिक्र था।
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डीएमके ने किस दावे को खारिज किया? 
बाबू ने विधानसभा में करुणानिधि और स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकारों के दौरान भ्रष्टाचार के सीएम विजय के हालिया आरोपों को महज एक घंटे तक बोले गए फिल्मी डायलॉग कहकर खारिज कर दिया।

डीएमके ने खुद को घायल शेर बताया
उन्होंने दावा किया कि सदन में डीएमके ने इस पर आपत्ति जताई और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन को आरोपों का जवाब देने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने आगे कहा, 'डीएमके एक घायल शेर की तरह मैदान में डटी हुई है। एक दिन इसका पूरा हिसाब-किताब बराबर किया जाएगा।'

डीएमके ने कुछ दिन पहले कहा था कि विधानसभा में विजय का भाषण कड़ी निंदा के लायक है क्योंकि इसमें पार्टी, पांच बार मुख्यमंत्री रहे करुणानिधि, दिवंगत केंद्रीय मंत्री मुरासोली मारन और पार्टी प्रमुख स्टालिन के त्याग का मजाक उड़ाया गया था।

क्या है पूरा मामला? 
डीएमके पर कड़ा हमला करते हुए, आक्रामक विजय ने 7 सितंबर को विधानसभा में पिछली सरकारों के दौरान कथित गंभीर और संगठित भ्रष्टाचार के लिए पार्टी को निशाने पर लिया। विजय ने दशकों पहले करुणानिधि के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार पर निशाना साधने के लिए सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का सहारा लिया। मुख्यमंत्री ने इस मामले में मारन का भी जिक्र किया था।

मुख्यमंत्री ने डीएमके के 2021-26 के कार्यकाल के दौरान कथित भ्रष्टाचार को लेकर राज्य सरकार के साथ साझा किए गए ईडी के आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला दिया। इस सिलसिले में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्टालिन और उनके डिप्टी उदयनिधि का नाम लिया।

कानून मंत्री निर्मल कुमार ने क्या कहा? 
कानून मंत्री निर्मल कुमार के अनुसार, ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है जिससे पता चले कि इमरजेंसी के दौरान स्टालिन को एमआईएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। मंत्री ने संकेत दिया था कि स्टालिन को दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके 20-सूत्रीय कार्यक्रम पर टिप्पणी करने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस कार्यक्रम की घोषणा केंद्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इमरजेंसी लागू होने के बाद की थी।

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