मैसूर शहर में एक सड़क का नाम कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नाम पर रखे जाने के मैसूर नगर निगम के प्रस्ताव का विपक्षी दलों ने विरोध किया है। जेडीएस ने केआरएस रोड का नाम सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग रखे जाने के कदम को निंदनीय करार दिया।
जेडीएस ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि सिद्धारमैया मुडा मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ लोकायुक्त जांच चल रही है। मैसूर नगर निगम में कोई निर्वाचित बोर्ड नहीं है। कांग्रेस सरकार की ओर से नगर निगम में नियुक्त किए गए अधिकारियों ने अपना ऋण चुकाने के लिए सिद्धारमैया के नाम पर सड़क का नाम रखने का फैसला किया है। मुडा घोटाले में शामिल मुख्यमंत्री के नाम पर सड़क का नाम रखना ऐतिहासिक शहर मैसूर और पूरे राज्य के साथ विश्वासघात और अपमान है।
सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ मुडा घोटाले की शिकायत करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने कहा कि जिस सड़क का नाम सिद्धारमैया के नाम पर रखने का प्रस्ताव है, वह ऐतिहासिक है। महाराजा नलवाड़ी कृष्णराज वाडियार ने टीबी के कारण मरने वाली अपनी बहन राजकुमारी कृष्णजम्मानी और उनके बच्चों की याद में एक विशाल भूमि दान की थी और वहां एक टीबी अस्पताल की स्थापना की थी।
कृष्णा ने कहा कि अधिकारियों ने सिद्धारमैया के नाम पर एक सड़क का नाम रखने का फैसला किया है, जो मुडा मामले में आरोपी हैं, जबकि उनके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। कई नागरिकों ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति जताई है। मैं इसके खिलाफ कानूनी रूप से भी लड़ रहा हूं। अगर प्रस्ताव वापस नहीं लिया जाता है, तो हम इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
मैसूर नगर निगम परिषद ने पास किया प्रस्ताव
मैसूर नगर निगम परिषद ने चामराजा कांग्रेस विधायक हरीश गौड़ा के सुझाव पर लक्ष्मी वेंकटरमणस्वामी मंदिर से आउटर रिंग रोड जंक्शन तक केआरएस रोड के एक हिस्से का नाम सिद्धारमैया आरोग्य मार्ग रखने का प्रस्ताव 22 नवंबर को पारित किया था। इसके बाद 13 दिसंबर को अधिसूचना जारी कर जनता से 30 दिनों के भीतर प्रस्ताव पर राय मांगी। मैसूर सीएम सिद्धारमैया का गृह जिला है।
क्या है मुडा मामला
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उनकी पत्नी पार्वती बीएम और उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) जमीन आवंटन मामले में आरोपी हैं। मुडा शहरी विकास के दौरान अपनी जमीन खोने वाले लोगों के लिए एक योजना लेकर आई थी। 50:50 नाम की इस योजना में जमीन खोने वाले लोग विकसित भूमि के 50% के हकदार होते थे। यह योजना 2009 में पहली बार लागू की गई थी। जिसे 2020 में उस वक्त की भाजपा सरकार ने बंद कर दिया।
सरकार द्वारा योजना को बंद करने के बाद भी मुडा ने 50:50 योजना के तहत जमीनों का अधिग्रहण और आवंटन जारी रखा। सारा विवाद इसी से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को इसी के तहत लाभ पहुंचाया गया। मुख्यमंत्री की पत्नी की तीन एकड़ और 16 गुंटा भूमि मुडा द्वारा अधिग्रहित की गई। इसके बदले में एक महंगे इलाके में 14 साइटें आवंटित की गईं। मैसूर के बाहरी इलाके में यह जमीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी ने 2010 में उपहार स्वरूप दी थी। मामले में लोकायुक्त पुलिस ने 27 सितंबर को एक विशेष अदालत के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज की है।