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नोटबंदी पर संसद में संग्राम, पीएम को बुलाने पर अड़ा रहा विपक्ष 

Tue, 22 Nov 2016 10:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
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नोटबंदी पर संसद में लगातार चौथे दिन भी विपक्ष ने एकजुट होकर हंगामा जारी रखा। लिहाजा, संसद के दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हो सका। समूचे विपक्ष ने प्रधानमंत्री को संसद में पेश होने और नोटबंदी पर जवाब देने की मांग की। साथ ही सरकार को नोटबंदी की वजह से कथित तौर पर मारे गये 70 लोगों को दस से 50 लाख रुपये तक का मुआवजा देने की मांग की। 
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राज्यसभा में विपक्ष ने 'पीएम की मन की बात, गरीब आदमी के पेट पर लात' जैसे नारे जोर शोर से लगाये। सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी इसका कड़ा विरोध किया। वहीं विपक्षी दलों के करीब 200 सांसद नोटबंदी के फैसले के खिलाफ बुधवार को संसद भवन परिसर में धरना देंगे। 

लोकसभा और राज्यसभा में सुबह से ही विपक्षी सदस्य हमलावर रहे। इससे सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में कांग्रेस, माकपा, जदयू, बसपा समेत ज्यादातर विपक्षी दलों ने कथित तौर पर मारे गये 70 लोगों को मुआवजा देने की मांग की। 
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दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर नारेबाजी की। राज्यसभा में कांग्रेस, बसपा और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने उपसभापति के आसन के सामने प्रधानमंत्री के खिलाफ जमकर नारे लगाये। राज्यसभा में सत्तापक्ष के सदस्यों ने भी विपक्ष के खिलाफ जमकर नारे लगाये। सत्तापक्ष के सदस्यों ने आगे आकर विरोध किया। 
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उपसभापति खो बैठे आपा

विपक्ष और सत्तापक्ष के सांसदों के हंगामे के चलते मंगलवार को उपसभापति पीजे कुरियन ने आपा खो दिया। वह सुबह से सांसदों को लगातार उनसे अपनी जगह पर लौटने और शांत होने की अपील करते रहे। लेकिन जब नारेबाजी और शोर-शराबा कम नहीं हुआ, तो उपसभापति अपना आपा खो बैठे। अपनी सीट से उठकर उन्होंने सत्तापक्ष को संबोधित करते हुए तल्ख अंदाज में कहा, 'मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आप लोगों की परेशानी क्या है? क्या शिकायत है आपकी क्या शिकायत है आपकी? यह सही तरीका नहीं है।'

उपसभापति की टिप्पणी का जवाब देते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, 'हमारी कोई शिकायत नहीं है। हमारी अपील है। 16 तारीख को विपक्ष की मांग के बाद हम चर्चा कराने के लिए तैयार हो गए थे। फिर जब बहस शुरू हुई, तो विपक्ष के पास ना कोई तथ्य है ना कुछ और। हमारी शिकायत नहीं, अपील है कि यह बहस टुकड़ों में न हो। 

उनकी इस बात पर जवाब देते हुए उपसभापति ने विपक्ष से कहा, 'जब आप यह मांग करते हैं कि प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए, तो यह बात मैं समझता हूं। लेकिन जब आप कहते हैं कि उन्हें यहां मौजूद होना चाहिए, तो यह बात मुझे समझ नहीं आती।' उन्होंने यह भी कहा, 'बहस के दौरान आप में से हर कोई यह मांग कर सकता है, लेकिन बहस तो होने दीजिए। अगर आप बहस ही नहीं होने देंगे, तो मैं कुछ नहीं कर सकता हूं।'
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