राज्यसभा में सवर्ण आरक्षण पर संविधान संशोधन बिल पास। पक्ष में 165 और विरोध में 7 वोट पड़े। अब ये बिल राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए जाएगा।
आरक्षण बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव गिरा। 174 सांसदों में से 155 ने कहा कि नहीं भेजना चाहिए।
सवर्ण आरक्षण: संविधान संशोधन बिल पर राज्यसभा में वोटिंग।
पीएल पुनिया, कांग्रेस- आरक्षण पर इनकी टेढ़ी नजर है। भाजपा और उसके रिमोट कंट्रोल की तरफ से बार बार कहा जाता है कि रिजर्वेशन को खत्म किया जाए, रिव्यू किया जाया।
सतीश चंद्र मिश्र, बसपा- मायावती, अखिलेश की मुलाकात की वजह से बिल लाया गया। सरकार को सपने में भी हाथी दिख रहा है। अभी गठबंधन नहीं बना है उससे पहले ही हाथी भाजपा को डराने लगा है। अल्पसंख्यकों के लिए अलग से आरक्षण हो। आपने नौकरियां लेने का काम किया है, बिल सिर्फ छलावा है।
रामविलास पासवान, केंद्रीय मंत्री: मैं नहीं जानता कि मनमोहन सिंह जी किस जाति के हैं, लेकिन वह ऊंची जाति के ही होंगे। आज एक गरीब तबके का आदमी ऊंची जाति के गरीबों के लिए आरक्षण की बात कर रहा है तो पेट में दर्द हो रहा है।
(इस दौरान पासवान द्वारा मायावती का नाम लेने पर सदन में हंगामा भी हुआ। बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्र ने पासवान से कहा कि मायावती की वजह से आप यहां है। )
कपिल सिब्बल, कांग्रेस सांसद- चुनावी नफा नुकसान के हिसाब से बिल क्यों लाया गया। क्या चुनावी नफा नुकसान से संविधान संशोधन होंगे। जब सरकारी नौकरियां ही नहीं है तो 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण किसलिए। सरकार बेवकूफ बना रही है। जितनी नई नौकरियां मिली हैं, उससे ज्यादा नौकरियां छीनी गई हैं। जिन एससी, एसटी, ओबीसी को नौकरी नहीं मिली है उनका क्या।
कपिल सिब्बल, कांग्रेस सांसद: आपने कोई डेटा जमा किया। हर प्रदेश में ओबीसी, अन्य जातियों का परसेंटेज क्या है। ये बिल सुझावों के साथ आता तो अच्छा था। एक दिन में सबकुछ कर रहे हैं। एक संविधान का संशोधन करने जा रहे हैं वो भी एक दिन में। सरकार हमें बताए कि क्या इस पर कोई रिपोर्ट बनी, 8 लाख का मापदंड कैसे तय किया। तो फिर जो इनकम टैक्स देते हैं उन्हें दायरे से बाहर कर दीजिए।
कांग्रेस सांसद कपिल सिब्बल रख रहे हैं अपनी बात।
रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री: कांग्रेस क्यों नहीं लाई संशोधन बिल। हम देर आए दुरुस्त आए। विपक्षी दल कह रहे हैं हम इसका समर्थन करते हैं, 'लेकिन....' समर्थन तो खुलकर करिए। आज तो बदलाव का दिन है, एतिहासिक दिन है, इसमें 'लेकिन' क्यों ला रहे हैं।
रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री- मौजूदा एससी-एसटी आरक्षण ज्यों का त्यो रहेगा। मौजूदा आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं। आपने 5 साल कुछ नहीं किया, हमने किया तो सवाल उठा रहे हैं। देश में अगड़े वर्ग के लोग भी गरीब हैं।
मनोज झा, राजद सांसद: सरकार लोगों को झुनझुना दिखाती है, देती नहीं है। इसके जरिए जातिगत आरक्षण को खत्म करने के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। मुझे सरकार की नीति और नीयत पर भी शक है।
डेरेक ओ ब्रायन, टीएमसी सांसद: आरक्षण बिल इसलिए लाया गया क्योंकि पिछले साढ़े चार साल में कोई रोजगार पैदा नहीं किया जा सका। भारत में गरीब उसे माना जाता है जिसकी दैनिक आमदनी 32 रुपये है, लेकिन सालाना 8 लाख रुपये कमाई के हिसाब से देखें तो रोजाना 2100 रुपये कमाने वाले गरीबी रेखा में आने चाहिए।
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा में सवर्ण आरक्षण बिल का समर्थन किया। हालांकि चर्चा के दौरान सांसद रामगोपाल यादव ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैं सत्ता पक्ष के लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या यह सरकार हमारी सरकार नहीं है? अगर हम इस बिल का समर्थन कर रहे हैं तो क्या इसमें हमारा योगदान नहीं है। रामगोपाल यादव ने निचली जातियों के साथ भेदभाव का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी में सरकार बदलने के बाद चीफ मिनिस्टर का बंगला भी धुलवाया गया था। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ रामगोपाल यादव की बहस भी हुई।
बिल के पेश होने के साथ ही हंगामा भी बढ़ गया है।