साल 2019 को बीतने में अब कुछ ही दिन रह गए हैं। नए वर्ष के स्वागत को लेकर अभी से हर जगह तैयारियां चल रही हैं। इसी बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2020 को 'नर्स और मिडवाइफ वर्ष' के रुप में मनाने का फैसला किया है। इसे दुनिया के स्वास्थ्य सुविधाओं में दिन-रात लगी महिलाओं के लिए विशेष माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में लगी महिलाओं को सम्मान देना और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संगठनों में उन्हें उच्च पद पर आगे बढ़ाना है।
दरअसल, वर्ष 2020 फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्म (12 मई 1820) का 200वां साल भी है। इसलिए इस वर्ष को नर्सों और मिडवाइफों के वर्ष के रुप में मनाकर नर्सों की अमूल्य सेवाओं के प्रति सम्मान प्रकट करना भी इसका एक बड़ा लक्ष्य है। फ्लोरेंस नाइटिंगेल को दुनिया की पहली आधुनिक नर्स कहा जाता है। वे रात के समय अपने हाथों में एक लैंप लेकर रोगियों की सेवा किया करती थीं। इसीलिए उन्हें 'दिये के साथ एक महिला' या 'The Lady With The Lamp' कहा जाता था। उनके नाम पर अनेक देशों ने अपने यहां पुरस्कार घोषित कर रखे हैं। भारत ने भी 1973 से राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार की शुरुआत कर रखी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में प्रति वर्ष संचारी रोगों के कारण 4.1 करोड़ लोगों की मौत होती है। इनमें लगभग 1.5 करोड़ की उम्र सीमा 30 साल से 69 साल के बीच होती है। यानी यह वह आबादी होती है जो किसी भी देश के लिए कामगर की तरह काम करती है और उस देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करती है। चूंकि, नर्सों की भूमिका संचारी रोगों के उपचार में बेहद कारगर होती है, अगर नर्सों की क्षमता को सही तरीके से उपयोग किया जाए तो इन मरने वाले लोगों की बड़ी समस्या से निबटा जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इस तरह स्पष्ट होता है कि नर्सों के कामकाज करने की परिस्थितियों में सुधार से किसी भी देश की अर्थ व्यवस्था में सुधार आ सकता है।