महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी तेवर से सूबे की राजनीति में तूफान उठने की संभावना है। कहा जा रहा है कि शिवसेना अंदर ही अंदर विपक्षी दल कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर नया गुल खिलाने की तैयारी में है। इस बीच, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शुक्रवार को अचानक मुंबई पहुंचे और आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों से मंत्रणा कर दिल्ली लौट गए। शिवसेना-बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं है।
हालांकि इसको लेकर कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है लेकिन, माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति नई करवट बदल सकती है।बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने दो टूक कहा था कि अब भविष्य में बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे। बीएमसी चुनाव नतीजे आने के बाद शिवसेना ने अब अपना तेवर दिखाना शुरू किया है।
बीते 6 मार्च से महाराष्ट्र विधानमंडल बजट सत्र शुरू है। शिवसेना के चलते लगातार चौथे दिन सदन की कार्यवाही नहीं चलने पाई। हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई मेयर पद पर भाजपा का प्रत्याशी न उतारने का ऐलान कर शिवसेना को सत्तासीन होने का न सिर्फ मौका दिया बल्कि उन्हें समर्थन भी दिया है। परन्तु, विधानसभा में किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर शिवसेना विधायकों का रवैया विपक्ष से भी ज्यादा आक्रामक हो गया है।