इसे केन्द्र सरकार की मेहरबानी कहें या राज्य में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव का असर, उत्तर प्रदेश में राष्टीय राजमार्ग (एनएच) की लंबाई दोगूनी की जाएगी। अभी यहां निवास करने वाली जनसंख्या के लिहाज से राष्ट्रीय राजमार्ग का औसत देखें तो यह राष्ट्रीय औसत से भी कम है।
केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई को दोगुनी करने के लिए सैद्घांतिक फैसला ले लिया गया है। कौन-कौन सी सड़कों को एनएच में बदला जाए, इसके लिए राज्य सरकार से पूछा गया है।
इस समय राज्य में कुल 8,483 किलोमीटर का एनएच नेटवर्क है, जिसमें से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण -एनएचएआई- के पास 4,529 किलोमीटर सड़क के रख-रखाव की जिम्मेदारी है जबकि राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग के पास 3,143 किलोमीटर सड़क है।
हाल ही में राज्य की 811 किलोमीटर सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घेाषित कर दिया गया है, लेकिन अभी तक इसके लिए राज्य लोक निर्माण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं मिल पाया है। इसके अलावा 2,591 किलोमीटर के सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग में बदलने के प्रस्ताव का अनुमोदन हो चुका है। इस तरह से राज्य में 11,074 किलोमीटर का नेटवर्क बन रहा है।
वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर देखें तो उत्तर प्रदेश में प्रति एक लाख जनसंख्या पर 4.25 किलोमीटर सड़क का नेटवर्क था जबकि उस समय राष्ट्रीय औसत 7.67 किलोमीटर का था। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। लेकिन यदि विद्यमान एनएच के नेटवर्क को दूना कर दिया जाए तो यह राष्ट्रीय औसत से ज्यादा हो जाएगा। इसलिए तय किया गया है कि उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई को दूना कर दिया जाए।
उत्तर प्रदेश में देखें तो अभी कुल राजमार्ग में चार लेन वाले राजमार्गों का हिस्सा 28 फीसदी है जबकि दो लेन वाले सड़कों की हिस्सेदारी 69 फीसदी है। दो लेन से कम चौड़े राष्ट्रीय राजमागों की हिस्सेदारी बेहद कम, तीन फीसदी है।
इसलिए सरकार चाहती है कि वहां चार लेन वाले सड़कों की लंबाई बढ़ाई जाए। अधिकारियों का कहना है कि दो लेन वाली सड़कों को चार लेन में बदलने के लिए प्रति दिन वाहनों की संख्या का जो पैमाना तय किया गया है, उसे भी घटाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक दो लेन की सड़कों को चार लेन में बदला जा सके।