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Milkipur Vidhan Sabha: मिल्कीपुर सीट पर कैसा रहा है BSP का प्रदर्शन, उपचुनाव नहीं लड़ने का क्यों उठाया कदम?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 13 Jan 2025 12:46 PM IST

सार

मिल्कीपुर विधानसभा सीट अब तक किसी एक पार्टी का गढ़ साबित नहीं हुई है। दरअसल, यहां कांग्रेस, भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) तक जीत दर्ज कर चुकी है। आइये जानते हैं बसपा के लिए इस सीट का क्या इतिहास रहा है? और जिस चेहरे को वह इस बार उतारना चाहती थी, उसका इससे पहले चुनावों में कैसा प्रदर्शन रहा है?
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यूपी कि मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर बसपा का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव नहीं लड़ेगी। पार्टी की तरफ से हाल ही में इसका एलान किया था। पहले पार्टी ने इस सीट पर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी रामगोपाल कोरी को उपचुनाव लड़वाने का फैसला लिया था। रामगोपाल ने इस सीट पर जमकर प्रचार भी किया था। 

लेकिन बीते साल के अंत में यूपी के नौ सीटों पर जो उपचुनाव हुआ, उसमें निराशाजनक प्रदर्शन ने बसपा के हौसले भी तोड़े हैं। हालांकि, उपचुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने उपचुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए भविष्य में कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया था। माना जा रहा है कि बसपा के पीछे हटने के बाद अब इस सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधा मुकाबला है।
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यूपी कि मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर बसपा का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव नहीं लड़ेगी। पार्टी की तरफ से हाल ही में इसका एलान किया था। पहले पार्टी ने इस सीट पर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी रामगोपाल कोरी को उपचुनाव लड़वाने का फैसला लिया था। रामगोपाल ने इस सीट पर जमकर प्रचार भी किया था। 

लेकिन बीते साल के अंत में यूपी के नौ सीटों पर जो उपचुनाव हुआ, उसमें निराशाजनक प्रदर्शन ने बसपा के हौसले भी तोड़े हैं। हालांकि, उपचुनाव के नतीजे सामने आने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने उपचुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए भविष्य में कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया था। माना जा रहा है कि बसपा के पीछे हटने के बाद अब इस सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सीधा मुकाबला है।

Milkipur By-ELection - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
कैसा रहा है इस सीट पर बसपा का प्रदर्शन?
मिल्कीपुर विधानसभा सीट अब तक किसी एक पार्टी का गढ़ साबित नहीं हुई है। दरअसल, यहां कांग्रेस, भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) तक जीत दर्ज कर चुकी है। आइये जानते हैं बसपा के लिए इस सीट का क्या इतिहास रहा है? और जिस चेहरे को वह इस बार उतारना चाहती थी, उसका इससे हले चुनावों में कैसा प्रदर्शन रहा है?
 

1. 1967 में अस्तिव में आई मिल्कीपुर सीट
साल 1967 में मिल्कीपुर नाम से सीट अस्तित्व में आई। तब मिल्कीपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के रामलाल मिश्रा को जीत मिली। दो साल बाद 1969 में राज्य में फिर से चुनाव हुए। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट भारतीय जन संघ के खाते में गई। जन संघ के उम्मीदवार हरिनाथ तिवारी ने कांग्रेस के कांग्रेस के बृजबासी लाल को 3579 मत से शिकस्त दी। 1974 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर में फिर कांग्रेस की वापसी हुई। पार्टी के उम्मीदवार धरम चंद्र ने भारतीय जनसंघ के शंकर नाथ त्रिपाठी को 14949 वोट से हराया।

2. 1989 में बसपा ने पहली बार लड़ा चुनाव
बहुजन समाज पार्टी ने पहली बार इस  सीट पर 1989 में चुनाव लड़ा। तब तक यहां से कम्युनिस्ट पार्टी का बोलबाला हो चुका था। हालांकि, 1989 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीन चुनाव जीत चुके सीपीआई के मित्रसेन यादव को हार का सामना करना पड़ा। इस बार कांग्रेस के बृजभूषण मणि त्रिपाठी को जीत मिली। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ने 6044 वोट से यह चुनाव जीता। इस चुनाव में बसपा उम्मीदवार ताहिर उमर खान को महज 5344 वोट मिले, पर वे 5.3 फीसदी वोट हासिल कर तीसरा स्थान पाने में सफल रहे। 

3. 1991 में बेहतर हुआ प्रदर्शन
अब आता है 1991 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी का खाता खुला। भाजपा के प्रत्याशी मथुरा प्रसाद तिवारी ने पार्टी को पहली जीत दिलाई। उन्होंने भाकपा के कमलासन पांडे को महज 415 मत से हराकर यह चुनाव जीता। बसपा का प्रदर्शन भी इस चुनाव में सुधरा और उसने अपने वोट प्रतिशत 11.8% पर आ गया। हालांकि, पार्टी के अवधेश यादव चौथे स्थान पर रहे।

मायावती। - फोटो : amar ujala
4. 1993 में कांग्रेस से भी आगे निकली बसपा
1993 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाकपा के मित्रसेन यादव की वापसी हुई। 12 साल बाद फिर भाकपा के मित्रसेन मिल्कीपुर में जीतने में कामयाब हुए। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार मथुरा प्रसाद तिवारी को महज 775 मत से हराया। इस चुनाव में भी बसपा ने अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया और उसे 14.5 फीसदी वोट प्राप्त हुए। चौंकाने वाली बात यह है कि कभी इस सीट पर भाकपा के वर्चस्व के बावजूद उसे हराने वाली कांग्रेस इस बार 11.9 फीसदी वोट के साथ चौथे स्थान पर खिसक गई।

5. 1996 में भाजपा के लिए मुसीबत बनी बसपा
1996 में मिल्कीपुर सीट पर फिर मित्रसेन यादव ने जीत का परचम लहराया। लेकिन इस बार वह समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे। इस चुनाव में मित्रसेन ने भाजपा उम्मीदवार बृजभूषण मणि त्रिपाठी को 6162 वोट से शिकस्त दी। एक गौर करने वाली बात यह रही कि इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार दिनेश प्रताप थे, जिन्हें 26210 वोट मिले। यानी बसपा इस चुनाव में भाजपा के लिए वोटकटवा साबित हुई। बसपा को यहां 19 फीसदी वोट हासिल हुए।

दो साल बाद 1998 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर मित्रसेन यादव सपा के टिकट पर फैजाबाद सीट से जीतकर सांसद बने। मित्रसेन के सांसद बनने के बाद मिल्कीपुर सीट खाली हो गई। इसके बाद यहां उपचुनाव हुए। इस उपचुनाव में सपा ने रामचंद्र यादव को टिकट दिया। रामचंद्र यादव उपचुनाव में जीतने में सफल रहे और मिल्कीपुर सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रहा। 

6. 2002 में घटे वोट, फिर उपचुनाव में बसपा ने मारी बाजी
2002 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में मिल्कीपुर सीट सपा ने मौजूदा विधायक रामचंद्र यादव की जगह मित्रसेन यादव के बेटे आनंद सेन यादव को टिकट दिया। आनंद सेन यादव ने जीत के साथ इस सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रखा। उन्होंने भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह को 3086 मत से हराया। दो साल बाद 2004 में देश में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में आनंद सेन के पिता मित्रसेन बसपा के टिकट पर फैजाबाद से चुनाव लड़े। मित्रसेन बसपा के टिकट पर सांसद बनने में सफल रहे। वहीं, उनके बेटे आनंद सेन ने भी पार्टी और विधायकी छोड़ दी। इसके बाद मिल्कीपुर सीट पर एक बार फिर उपचुनाव की नौबत आई। 

इस उपचुनाव में आंनद सेन बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे। वहीं, सपा ने 1998 में यहां से जीते रामचंद्र यादव को टिकट दिया। इस उपचुनाव में सत्ताधारी सपा के उम्मीदवार रामचंद्र यादव को जीत मिली। रामचंद्र ने आनंद सेन को 35018 वोट से हरा दिया। ये दूसरा मौका था जब रामचंद्र उपचुनाव जीतकर विधायक बने थे।  

7. 2007 में जेल में थे आनंदसेन, फिर भी बसपा जीती
2007 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर मुख्य मुकाबला रामचंद्र और आनंद सेन के बीच ही हुआ। हालांकि, इस बार मिल्कीपुर सीट का नतीजा बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार आनंदसेन यादव के पक्ष में रहा। उन्होंने सपा उम्मीदवार रामचंद्र यादव को 9379 वोट से हराया। इस जीत के बाद उन्हें मायावती के मंत्रिमंडल में खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री बनाया गया। हालांकि, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान आनंदसेन जेल में थे और एक अदालत ने उन्हें मोहलत देने से मना कर दिया क्योंकि वे 'गंभीर आपराधिक आरोपों' के चलते जेल में थे। आखिरकार, उनके लिए दूसरा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। नवंबर 2007 में आनंदसेन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और जांच शुरू हो गई। 

मिल्कीपुर सीट - फोटो : AMAR UJALA
8. 2012 में सपा के हाथों बसपा को मिली करारी हार
2008 में राज्य की विधानसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन हुआ। इसके बाद मिल्कीपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गई। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की तरफ से अवधेश प्रसाद उम्मीदवार बने और जीते भी। उन्होंने बसपा के पवन कुमार को 34237 मत से शिकस्त दी थी। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का वोट शेयर सपा से 20 फीसदी कम रहा। हालांकि, पार्टी ने इस चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस से ज्यादा वोट हासिल किए।

9. 2017 में योगी लहर ने तीसरे नंबर पर ढकेला
2017 के विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर सीट भाजपा के खाते में गई। मिल्कीपुर की सियासी लड़ाई भाजपा के उम्मीदवार बाबा गोरखनाथ के नाम रही। उन्होंने सपा के टिकट पर उतरे अवधेश प्रसाद को 13338 मत से शिकस्त दी। बसपा इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रही। उसकी तरफ से उम्मीदवार रामगोपाल को 46,027 वोट मिले।

10. 2022 में वोट प्रतिशत में दहाई का आंकड़ा नहीं छू पाई बसपा
2022 के विधानसभा चुनाव में मिल्कीपुर में मुकाबला भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। सपा ने अवधेश प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया तो भाजपा के टिकट पर बाबा गोरखनाथ उतरे। सपा के अवधेश यह चुनाव 13338 मत से जीतने में सफल रहे। सपा प्रत्याशी को 103905 वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी को 90567 वोट मिले। 1989 में पहली बार बसपा के लड़ने की बात छोड़ दें तो यह उसका सबसे खराब प्रदर्शन था। बसपा को इस चुनाव में सिर्फ 6.7 प्रतिशत वोट ही मिले। उसकी प्रत्याशी मीरा देवी को चुनाव में सिर्फ 14,427 वोट ही मिले।

इस उपचुनाव में कौन लड़ने वाला था, क्या थीं उम्मीदें?
2025 में होने वाले उपचुनाव के लिए बसपा पहले रामगोपाल कोरी को उम्मीदवार बनाने वाली थी। उनकी तरफ से चुनाव के लिए प्रचार की तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। हालांकि, अब बसपा के न लड़ने से रामगोपाल की उम्मीदों को भी झटका लगा है। बसपा के इस उपचुनाव में न खड़े होने से यह मुकाबला सीधा भाजपा और सपा के बीच है। यानी बसपा दोनों में से किसी पार्टी के लिए वोटकटवा साबित नहीं होगी, जबकि 2017 में सपा की हार की बड़ी वजह बसपा को मिले वोट थे। 

सीएम योगी आदित्यनाथ, मायावती व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
मिल्कीपुर उपचुनाव को लेकर बसपा तय करेंगी रणनीति
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती 15 जनवरी को अपने जन्मदिन के बाद मिल्कीपुर उपचुनाव को लेकर रणनीति तय करेंगी। बता दें, बसपा मिल्कीपुर उपचुनाव नहीं लड़ रही है। ऐसे में पार्टी समर्थक किस दल को वोट करें, इस बारे में बसपा सुप्रीमो संकेत दे सकती हैं। इस बाबत उन्होंने 16 जनवरी को पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है जिसमें सदस्यता अभियान, संगठन के विस्तार, कैडर कैंप और पार्टी के साथ मुस्लिमों, ब्राह्मणों एवं अन्य वर्गों को जोड़ने के अभियान की समीक्षा होगी।

अब उपचुनाव की जरूरत क्यों?
हाल के लोकसभा चुनाव के बाद जिन सीटों पर हार-जीत की सबसे ज्यादा चर्चा हुई उसमें फैजाबाद (अयोध्या) शामिल है। यूपी में भाजपा की सीटें कम होने के साथ अयोध्या जिले की फैजाबाद लोकसभा सीट पर भी हार का सामना करना पड़ा था। मिल्कीपुर से विधायक और सपा उम्मीदवार अवधेश प्रसाद यहां से करीब 54 हजार मतों से जीत गए। बाद में उन्होंने यूपी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और लोकसभा के सदस्य बन गए। इस तरह से अवधेश प्रसाद के सांसद बनने से मिल्कीपुर विधानसभा सीट रिक्त हो गई। 

बसपा के मैदान से बाहर जाने से मिल्कीपुर उपचुनाव में भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला होने के आसार बढ़ गए हैं। सपा ने सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे अजित प्रसाद को टिकट दिया है तो भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। वहीं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी मिल्कीपुर में अपना प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया है, जिससे मुकाबला रोचक हो सकता है। बता दें कि कांग्रेस ने मिल्कीपुर उपचुनाव में सपा प्रत्याशी का समर्थन करने का एलान किया है।
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