उत्तर प्रदेश में इस बार कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी जिस तरह महिलाओं के बीच अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में लगी हैं और पहली बार अलग से जारी किए गए महिला घोषणापत्र में जो वादे किए हैं, उससे पार्टी को बहुत उम्मीदें हैं। प्रियंका गांधी ने ये एलान करके आने वाले दिनों का संकेत भी दे दिया है कि अभी तक कांग्रेस ने करीब सौ उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं जिनमें 60 महिलाएं हैं। जाहिर है अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए इस बार कांग्रेस की नजर प्रदेश की 45 फीसदी महिला वोटरों पर है।
आंकड़े देखें तो प्रदेश के 14.40 करोड़ मतदाताओं में महिला वोटरों की संख्या 6.61 करोड़ है। कांग्रेस को लगता है कि अगर इनमें से 50 फीसदी को भी वो अगर अपने पक्ष में वोट देने के लिए तैयार कर पाई तो ये उसकी बहुत बड़ी कामयाबी होगी। कांग्रेस की कोशिश है कि वो भाजपा सरकार की उन तमाम योजनाओं और घोषणाओं की असलियत भी महिलाओं को बताए जिसे मूल रूप से कांग्रेस अपना मानती है। चाहे वो उज्जवला योजना हो, पक्के घर और मुफ्त राशन की बात हो या आर्थिक मदद वाली वो योजनाएं जिनका सीधा लाभ महिलाओं को मिल रहा है।
कांग्रेस का महिला घोषणापत्र अगर देखें तो उसमें कोशिश की गई है कि महिलाओं को हर मोर्चे पर आगे लाया जाए और पुरुषों के बराबर खड़ा कर दिया जाए। इसमें पहली कोशिश महिलाओं को राजनीतिक तौर पर जागरूक और सक्रिय बनाना और चुनाव लड़ने के लिए आगे बढ़ाना है। इसके लिए महिलाओं के भीतर आत्मविश्वास भरने के मकसद से 6 मुख्य बिंदुओं पर काम करने का वादा किया गया है।
ये 6 मुद्दे हैं
शक्ति विधान यानी राजनीतिक रूप से शक्तिशाली बनाने की बात, स्वावलंबन यानी आत्मनिर्भरता, शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा, सेहत। महिलाओं को 40 फीसदी टिकट देने की कोशिश इसी शख्ति विधान के तहत है। प्रियंका ने बढ़ चढ़कर ऐसा कोई दावा नहीं किया कि हर उम्मीदवार जीतेगा ही। उन्होंने हारने की बात भी की और कहा कि हारने या जीतने से कोई फर्क नहीं पड़ता, मुख्य बात महिलाओं को अपने बल पर चुनाव लड़ने के लिए सामने लाना है।
भाजपा को सत्ता से हटाना पहला लक्ष्य
कांग्रेस के एक रणनीतिकार ने अमर उजाला को बताया कि अभी हमारी सबसे पहली कोशिश भाजपा को सत्ता से हटाना है। पार्टी को मजबूत करने के साथ ही अगर जरूरत पड़ी तो हम उन ताकतों के साथ खड़े होंगे जो प्रदेश से भाजपा का सफाया करने में लगी हैं। जाहिर है भाजपा की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस सिर्फ खोखली घोषणाएं करके अपना आधार नहीं बढ़ा सकती है।
महिलाओं को बूथ तक लाएंगे
कांग्रेस नेता बताते हैं कि इसके लिए पार्टी ने महिलाओं की एक लंबी चौड़ी टीम बनाई है जो शहरों के अलावा गांव और कस्बों के घर घर में महिलाओं को ये घोषणापत्र बांटेंगी और उन्हें बाकायदा इसके सभी बिंदु समझाने का प्रयास भी करेंगी। ये काम शुरू भी हो चुका है और महिलाओं में इसे लेकर उत्साह भी देखने को मिल रहा है। अभी हमारी बड़ी चुनौती है कि महिला वोटरों को घर से निकाल कर बूथ तक लाना है, क्योंकि आज भी करीब 40-45 फीसदी महिलाएं ही वोट करती हैं। जहां तक राजनीति में प्रतिनिधित्व की बात है केवल 10 फीसदी महिलाओं को ही मौका मिलता है और इनमें से भी ज्यादातर अपने पति के इशारों पर काम करती हैं। पार्टी की कोशिश इस मानसिकता से महिलाओं को बाहर निकाल कर उन्हें उनकी ताकत का एहसास दिलाना है।
महिला घोषणापत्र के साथ कांग्रेस ने महिलाओं के लिए जो थीम सांग जारी किया है उसमें महिलाओं को दुर्गा का रूप बताते हुए उसे आगे आने का आह्वान किया गया है और 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' के नारे को और बुलंद करने की कोशिश की गई है। कांग्रेस के नेता मानते हैं कि अब ये थीम सांग तेजी से गांव गांव तक पहुंचेगा और इसे सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म के जरिये लोगों के बीच पहुंचाया जा रहा है।