यूपी की अमेठी विधानसभा सीट इस समय प्रदेश की सबसे हॉट सीट बनी हुई है, वजह है इस राजसी सीट पर एक रानी और पटरानी की आपसी टक्कर। अमेठी राजघराने के राजा संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह और पूर्व पत्नी गरिमा सिंह चुनावी मैदान में आमने सामने हैं।
अपने मान सम्मान के नाम पर गरिमा सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं तो उन्हीं के साथ एक छत के नीचे रहने वाली अमिता सिंह कांग्रेस के टिकट पर उनके सामने हैं। संबंधों की यह लड़ाई अकेले अमेठी में ही नहीं है प्रदेश की कई सीटें ऐसे ही धर्मसंकट की गवाह बनी हुई हैं।
अमेठी के नजदीक ही रायबरेली की हरचंदपुर विधानसभा सीट पर रोचक मुकाबला है। भाजपा के टिकट पर कंचन लोधी यहां वोटरों को लुभाने का प्रयास कर रही हैं तो उनकी सास गुडिया लोधी ने भी उनके सामने ताल ठोक दी हैं। बुजुर्ग गुडिया इंडियन जस्टिस पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं।
गुडिया भी अपने मान सम्मान के नाम पर चुनावी मैदान में हैं और जनता के सामने इस बात को खूब पेश करती हैं। हालांकि कंचन इस बात को सिरे से खारिज करती हैं, वो कहती हैं कि उन्हें किसी ने मेरे खिलाफ बहकाया है उनके सम्मान में मैने कभी कमी नहीं की।
रायबरेली की दो सीटों पर रोचक मुकाबला
रायबरेली की ही एक अन्य सीट पर संबंधों का दिलचस्प मुकाबला है, बछरावां विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के निर्वतमान विधायक रामलाल अकेला रालोद के टिकट पर मैदान में हैं तो अभी तक सपा से टिकट की आस लगाए बैठे उनके बेटे विक्रांत ने निर्दलीय ही चुनाव में ताल ठोक दी है।
बाप बेटे की इस लड़ाई पर विक्रांत कहते हैं कि चिंता की कोई बात नहीं है राजनीति के गुर मैंने अपने पिता से ही सीखे हैं और जीतने के बाद उनके सिद्धांतों पर आगे बढूंगा।
इलाहाबाद की दक्षिणी विधानसभा से बसपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे नंद गोपाल नंदी भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं तो उनके सामने उनकी ही पत्नी और शहर की मेयर अभिलाषा गुप्ता ने ताल ठोंक दी है।
इलाहाबाद में नंद कुमार नंदी के सामने उनकी पत्नी
खास बात ये है कि कुछ दिन पहले तक ही नंदी ने कांग्रेस की सदस्यता ली थी लेकिन वहां टिकट न मिलता देख उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने भी उन्हें टिकट पकड़ाने में देर नहीं की। नंदी को टिकट मिलना था कि उनकी पत्नी अभिलाषा ने भी निर्दलीय ही उनके सामने ताल ठोंक दी।
इसके अलावा जिले की हडिया विधानसभा सीट पर भी रोचक मुकाबला है। यहां भाजपा ने पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी की पत्नी को टिकट दिया है तो उनके सामने उनके बेटे प्रभात त्रिपाठी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है। हालांकि वह किसी तरह के मतभेद की बात से इंकार करते हैं।
दूसरी ओर बड़ी संख्या में सगे रिश्तेदारों के आमने-सामने चुनाव लड़ने के मामलों को इस तरह भी देखा जा रहा है कि नेताओं ने डमी कैंडीडेट के रूप में उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है, जिससे किसी कारणवश टिकट कैंसिल होने पर उन्हें चुनाव लड़ाया जा सके।