यूपी के विधानसभा चुनाव इस बार कई मायनों में खास होने जा रहे हैं। भाजपा जहां सूबे से अपना 15 बरस का बनवास खत्म करने के लिए पूरा दम झोंक रही है वहीं कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन कर इसे सत्ता में वापसी के तौर पर देख रही है। ऐसे में हर कोई किसी न किसी तरह यूपी के तख्त पर कब्जा करना चाहता है।
इसी कवायद में तमाम पार्टियों ने अपने कई दिग्गजों को यूपी के रण में उतार दिया है। इनमें से कई तो ऐसे हैं जो पूर्व में सांसद और केंद्रीय मंत्री तक रह चुके हैं, लेकिन अब विधायक बनने के लिए क्षेत्र में एडियां रगड़ रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस सहित कई बड़ी पार्टियों ने ऐसे ही दिग्गजों को टिकट दिया है। आइए डालते हैं ऐसे ही दिग्गजों पर एक निगाह।
सुरेन्द्र गोयल-कांग्रेस
गाजियाबाद के दिग्गज कांग्रेस नेता रहे सुरेन्द्र गोयल इसी सीट से 2004 लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। इससे पहले तक वह लगातार इस सीट से विधायक चुने जाते रहे हैं। लेकिन 2009 में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के हाथों मात खाने के बाद सुरेन्द्र गोयल राजनीति में नेपथ्य में चले गए थे।
लेकिन प्रदेश की सत्ता में वापसी करने की मंशा से पार्टी ने एक बार फिर अपने इस दिग्गज नेता को चुनावी मैदान में उतार दिया है। गोयल को इस बार गाजियाबाद की मुरादनगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।
रमेश चंद तोमर भाजपा
राजनाथ सिंह से पहले रमेश चंद तोमर ही गाजियाबाद से भाजपा के सांसद हुआ करते थे। उस दौर में इनका नाम केंद्र में मंत्री पद के लिए भी चला लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। साल 2004 के चुनावों में उन्हें कांग्रेस के सुरेन्द्र गोयल से मात मिली तो वो पार्टी में भी हाशिये पर आते चले गए। लंबे समय बाद उन्होंने एक बार फिर राजनीति में वापसी की। दो बार भाजपा से सांसद रहे तोमर को पार्टी ने इस बार ठाकुर बहुल हापुड़ जिले की धौलाना विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।
अवतार सिंह भड़ाना भाजपा
चार बार सांसद रहे अवतार सिंह भड़ाना की गिनती कांग्रेस के उन नेताओं में होती रही है जिन्हें जहां से भी चुनाव लड़ाया गया वहां उन्होंने पार्टी को फतह ही दिलवाई। लेकिन मोदी लहर में भड़ाना फरीदाबाद से पिछला चुनाव क्या हारे पार्टी में ही उन्हें किनारे कर दिया गया। इसके बाद पाला बदलकर वह भाजपा में आ गए। भाजपा ने भी उन्हें इनाम स्वरूप यूपी के मुजफ्फरनगर जिले की मीरापुर सीट से उम्मीदवार बना दिया है। चार बार लोकसभा की दहलीज छू चुके भड़ाना के लिए ये चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न भी बन गया है। अगर वह चुनाव जीतते हैं तो पार्टी में अच्छे मुकाम की उम्मीद भी कर सकते हैं और अगर उन्हें हार मिली तो कांग्रेस की तरह भाजपा में भी हाशिये पर जा सकते हैं।
जितिन प्रसाद कांग्रेस
पूर्व केंद्रीय मंत्री और शाहजहांपुर सीट से लोकसभा सांसद रहे जितिन प्रसाद की गिनती कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी नेताओं में होती है। जब तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही जितिन प्रसाद की तूती बोलती रही, लेकिन राजनीति की विडंबना ऐसी है कि अब उन्हें विधानसभा चुनाव के लिए घर घर जाकर वोट मांगना पड़ रहा है। पार्टी ने उन्हें शाहजहांपुर जिले की तिलहर सीट से उम्मीदवार बनाया है।
राजेश मिश्र कांग्रेस
जितिन प्रसाद की तरह कांग्रेस ने एक और पूर्व सांसद राजेश मिश्र को विधानसभा चुनावों में उतार दिया है। पार्टी ने उन्हें वाराणसी दक्षिण सीट से उम्मीदवार बनाया है। खास बात ये है कि मिश्र वाराणसी से कांग्रेस के लिए लोकसभा सांसद रहे हैं।
राजाराज पाल कांग्रेस
महाराजपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी राजाराम पाल वर्तमान में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। पूर्व में वह अकबरपुर की लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। वह बीते चुनाव में भी पार्टी के टिकट पर किस्मत आजमा चुके हैं।
बीएल खाबरी कांग्रेस
कुछ दिन पहले तक बसपा के झंडे तले बहनजी की रैलियों की कमान संभालने वाले बीएल खाबरी को उनकी वफादारी का इनाम राज्यसभा सीट के तौर पर मिला था। लेकिन चुनावों से कुछ दिन पहले ही खाबरी ने बसपा का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। पार्टी ने उन्हें तुरंत ललितपुर जिले की मेहरानी सीट से उम्मीदवार घोषित कर मैदान में उतार दिया।
कमल किशोर कांग्रेस
पूर्व में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे कमल किशोर बहराइच सीट से कांग्रेस के सांसद रहे हैं। इस बार पार्टी ने उन्हें गोरखपुर की खजनी विधानसभा सीट से मैदान में उतार दिया है।