अमौसी बेशक एयरपोर्ट के लिए बरसों से मशहूर रहा हो, लेकिन इस गांव की हालत में कोई खास सुधार नहीं हो सका है। यहां की महिलाएं खुलकर नहीं बोलतीं कि कौन बेहतर है, लेकिन इतना जरूर कहती हैं कि हमारे लिए सब सरकार एक जैसी है। एक महिला अपना नाम तो नहीं बताती, लेकिन पल्लू ढक कर अखिलेश की तारीफ करती है। कहती है कि उन्होंने ही यहां सड़क बनवाई। किसी उम्मीदवार का नाम उसे पता नहीं है, बस कमल और साइकिल जानती है।
योगी आदित्यनाथ ने अच्छा काम किया है
सिंगार नगर किसी जमाने में सिखों का गढ़ होता था। लेकिन 84 के दंगों के बाद सिंगार नगर की हवा बदल गई। कांग्रेस को लेकर यहां लंबे समय तक नफरत दिखती रही। यहां के वोट बसपा और सपा के बीच बंटते रहे। इस बार यहां ज्यादातर लोग राजेश्वर सिंह की बात करते दिख रहे हैं। भाजपा और योगी की तारीफ करते हैं। हरनाम सिंह कहते हैं कि हमें तो ऐसे ही कड़क आदमी की जरूरत है, जो गुंडों पर लगाम लगाए। योगी आदित्यनाथ ने अच्छा काम किया है। एक हमने मायावती के शासनकाल में सख्ती देखी और अब योगी के शासनकाल में देख रहे हैं। सपा उम्मीदवार अभिषेक मिश्रा को वे अच्छा तो बताते हैं लेकिन सपा को लेकर उनकी धारणा खराब है।
राजेश्वर सिंह को प्रशासनिक छवि का फायदा
सोरोजनी नगर में स्वाति सिंह का टिकट कटने का जितना शोर मीडिया में सुनाई पड़ता है, वैसा यहां के लोगों में नहीं दिखता। सपा से लंबे समय से जुड़े रहे राहुल सेन सक्सेना कहते हैं कि स्वाति सिंह तो पिछली बार एक्सीडेंटल तरीके से जीत गईं और मंत्री बन गईं, वरना उनको जानता कौन था। ऐसा कोई काम भी नहीं किया उन्होंने। इस सीट पर भाजपा और सपा में कड़ी टक्कर है। राहुल कहते हैं कि दोनों ही पार्टियों के मजबूत उम्मीदवार हैं। अच्छी इमेज के बावजूद अभिषेक मिश्रा यहां ब्राह्मणों को कितना अपनी तरफ खींच पाएंगे, कहना मुश्किल है। कैंट में तो उनकी थोड़ी बहुत पकड़ जरूर थी, लेकिन पार्टी ने सीट बदल दी। राजेश्वर सिंह को उनकी प्रशासनिक छवि का फायदा मिल सकता है। राहुल सेन बताते हैं कि सरोजनी नगर में यादव वोटों पर शिवपाल सिंह यादव की पकड़ रही है, लेकिन यहां उम्मीदवार यादव नहीं दिया गया। शिवपाल चाहते थे पूर्व विधायक श्याम किशोर यादव के भाई रामसिंह यादव को टिकट दिलवाना, लेकिन नहीं मिला, इससे यादव नाराज हैं। दूसरी तरफ यहां से 2012 में सपा के विधायक रहे शारदा प्रसाद शुक्ला को टिकट नहीं दिए जाने से और उनके भाजपा में जले जाने से भी सपा की स्थिति कमजोर हुई। ऐसे में अभिषेक मिश्रा कितने ब्राह्मण वोट ले पाएंगे, कहना मुश्किल है।
बसपा का कोई नामलेवा नहीं
इस इलाके में सबसे ज्यादा करीब 110000 ब्राह्मण वोट हैं, जबकि अनुसूचित जाति के 90 हजार वोट, क्षत्रिय 60 हजार तो यादव करीब 50 हजार वोटर हैं, ओबीसी और मुस्लिम भी 30-30 हजार मतदाता हैं। अब जातिगत आधार पर चुनावी गणित लगाने वाले मानते हैं कि आईपीएस की नौकरी छोड़कर आने वाले राजेश्वर सिंह को क्षत्रिय वोटों के अलावा भाजपा के नाम पर ब्राह्मण वोट भी मिलेंगे, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार रुद्रदमन सिंह उनके कुछ ठाकुर वोट काट सकते हैं। रुद्रदमन सिंह स्थानीय हैं औऱ पिपरसंड गांव के रहने वाले हैं। कांग्रेस की तरफ कुछ महिला वोट भी आएंगे। बसपा ने यहां से मोहम्मद जलीस खान को इस उम्मीद से उतारा है कि उसे अनुसूचित जाति, ओबीसी और मुस्लिम वोट मिल जाएंगे लेकिन स्थानीय लोगों से बातचीत में बसपा का कोई नाम भी नहीं लेता और सीधा मुकाबला भाजपा और सपा का ही माना जा रहा है।
राजेश्वर सिंह की पत्नी हैं लखनऊ की आईजी
सरोजनी नगर को हॉट सीट बना देने वालीं स्वाति सिंह बेशक इस बार मैदान में न हों, लेकिन उनको ये श्रेय देने वालों की कमी नहीं है कि उनकी बदौलत ही भाजपा ने पहली बार 2017 में ये सीट अपने कब्जे में की थी। जाहिर है तब मोदी लहर थी, लेकिन इस बार राजेश्वर सिंह यहां योगी लहर बनाने की कोशिश में जुटे हैं औऱ अपनी सभाओं और जनसंपर्क अभियानों में योगी का जबरदस्त गुणगान कर रहे हैं। जबकि 2012 में अखिलेश सरकार में मंत्री रहे और आईआईएम में प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर अखिलेश के दोस्त बने अभिषेक मिश्रा भी जीत के लिए अखिलेश की पिछली सरकार में रहते हुए किए गए अपने काम गिनाने में कसर नहीं छोड़ रहे और इस बार प्रदेश में बदलाव की बात कर रहे हैं। हालांकि अभिषेक मिश्रा को डर है कि चुनाव में गड़बड़ी हो सकती है क्योंकि लखनऊ की आईजी लक्ष्मी सिंह उनके प्रतिद्वंदी और भाजपा उम्मीदवार राजेश्वर सिंह की पत्नी हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से लक्ष्मी सिंह को हटाने की मांग भी की है। देखना दिलचस्प होगा कि सरोजनी नगर के मतदाता किसपर भरोसा जताते हैं।