मथुरा बवाल के बाद यूपी के डीजीपी जाविद हमीद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि कल की घटना के दौरान पुलिस केवल निरीक्षण के लिए गई थी, कार्रवाई की योजना दो-तीन दिन बाद की थी। इस दौरान पुलिस प्रशासन कोई कार्रवाई के मूड में नहीं थी। हालांकि पुलिस के निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान ही प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया।
इधर ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि इस घटना के बाद मथुरा के डीएम और एसएसपी पर गाज गिर सकती है। हालांकि ये बात अभी पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही सरकार की तरफ से इन्हें बर्खास्त करने का कोई पत्र मिला है।
डीजीपी के मुताबिक प्रदर्शनाकरियों ने पुलिस टीम पर लाठी-डंडों, हथियारों से हमला कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पहले से ही गोला-बारूद भी एकट्ठा कर रखे थे। उन्होंने उन झोपड़ियों में आग लगाई जिसमें पहले से गैस सिलेंडर रखे हुए थे। इस दौरान हमारे दो पुलिस अधिकारी शहीद हो गए।
डीजीपी ने बताया कि पुलिस टीम पर हथियारों से हमला किया गया। इस कार्रवाई में 23 पुलिसकर्मी घायल हैं। उन पर गोलियों और लाठियों से हमला किया गया जिससे उन्हें गंभीर चोटें भी आई हैं।
चल रही बर्खास्त किए जाने की खबरें
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा
डीजीपी ने बताया कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुआ विवाद कई घंटे तक चलता रहा। इस कार्रवाई में मथुरा की जनता ने पुलिस का साथ दिया। जिसके चलते जवाहर बाग को पूरी तरह से खाली करा लिया गया है।
डीजीपी जाविद हमीद के मुताबिक इस कार्रवाई में कुल 22 उपद्रवियों की जान गई है। वहीं पुलिस के दो अधिकारी भी शहीद हुए हैं। वहीं इस कार्रवाई में 196 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसमें 80 पुरुष और 116 महिलाएं शामिल हैं। इन पर बलवा और हत्या करने जैसी संगीन धाराएं लगाई गई हैं।
डीजीपी ने बताया कि कार्रवाई के बाद पुलिस ने 47 कट्टे, 6 राइफल, 148 जिन्दा कारतूस, 15 गाड़ियां, 6 मोटर साइकिल बरामद किये हैं। इनका नेतृव करने वाले सम्भवतः रामवृक्ष यादव, चन्दन बोस, गिरीश और राकेश की मौत हो गई है। गिरफ्तार लोगों पर NSA लगाया जाएगा।