उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित अभी तक पार्टी में अनदेखी से नाराज बताई जा रही थीं लेकिन सहारा डायरी में नाम आने के बाद पार्टी ने उनसे पूरी तरह से किनारा कर लिया है। पार्टी ने सोमवार को साफ कर दिया कि डायरी में जिन लोगों के भी नाम शामिल हैं, उनकी जांच होनी चाहिए।
दरअसल शीला दीक्षित ने उस दस्तावेज को सिरे से खारिज कर दिया है कि जिस आधार पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। इस दस्तावेज में शीला का नाम भी शामिल है। पार्टी के इस दस्तावेज की जांच कराने के फैसले को लेकर शीला दीक्षित का कहना है कि पार्टी में कोई फैसला हाईकमान लेता है। इस संबंध में अभी उनकी कोई बात नहीं हुई है।
सहारा की डायरी में शीला दीक्षित का नाम होने पर भाजपा ने इसे प्रमुखता से उठाया है। कांग्रेस को लगता है कि शीला का समर्थन करके वह प्रधानमंत्री के खिलाफ छेड़ी गई जंग हार जाएगी। लिहाजा शीला को लेकर घिरी कांग्रेस की ओर से प्रवक्ता जयराम रमेश ने स्पष्ट तौर पर कहा कि डायरी में जिन लोगोें के भी नाम हैं, उनकी जांच होनी चाहिए।
शीला दीक्षित ने अमर उजाला से कहा कि मुझे नहीं पता कि पार्टी ने क्या कहा है। जब तक जानकारी नहीं होगी कुछ नहीं कहूंगी। खुद के यूपी चुनाव से हटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे कुछ नहीं कहना है।