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UP BJP President: यूपी बीजेपी को जल्द मिलेगा नया अध्यक्ष, दिनेश शर्मा, केपी मौर्या में किसकी दावेदारी मजबूत

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दिनेश शर्मा, योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य। (बाएं से दाएं) - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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यूपी भाजपा को बहुत जल्द नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन मंत्री बीएल संतोष के साथ प्रधानमंत्री आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस बैठक में यूपी भाजपा के अध्यक्ष के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। पार्टी इस बार प्रदेश में ब्राह्मण या ओबीसी चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। इन नामों में यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा और हरीश द्विवेदी का नाम सबसे आगे है। यदि सपा के पीडीए समीकरण को मात देने के लिए भाजपा दलित अध्यक्ष के नाम पर आगे बढ़ती है तो इसमें भाजपा के पूर्व सांसद रामशंकर कठेरिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है।
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भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यूपी के अध्यक्ष के लिए प्राथमिक तौर पर केंद्रीय नेतृत्व ने विचार कर लिया था। इन नामों को लेकर पार्टी के संगठन मंत्री बीएल संतोष ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, केशव प्रसाद मौर्या सहित कई शीर्ष नेताओं से बातचीत की थी। अब बीएल संतोष ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपी है। अब पहले से चयनित कुछ नामों में से किसी एक पर मुहर लगाई जा सकती है।  

जानकारी के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष के लिए चयनित नामों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी विचार-विमर्श किया गया है। आरएसएस नेता अरुण कुमार भी उस बैठक में शामिल थे जिसमें यूपी के शीर्ष नेताओं के साथ बीएल संतोष ने बैठक की थी। यानी नए प्रदेश अध्यक्ष को संघ की भी पूरी सहमति मिल चुकी है। 
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दिनेश शर्मा चेहरा क्यों?
ब्राह्मण चेहरे दिनेश शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पार्टी प्रदेश के ब्राह्मणों को अपने साथ जोड़ने की मजबूत कोशिश कर सकती है। प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी 12 से 15 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। वे भाजपा के कोर वोटर साबित हुए हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में ब्राह्मणों की भाजपा से कुछ नाराजगी होने की बातें कही जा रही थीं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी एक ब्राह्मण को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर समाज के इस सबसे मुखर वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर सकती है।

दिनेश शर्मा पार्टी संगठन से जुड़े रहे हैं और कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। वे 1993 में ही प्रदेश के भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे  लखनऊ के मेयर, विधान परिषद में नेता सदन और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। वे गुजरात-हरियाणा के साथ-साथ कई प्रदेशों के भाजपा प्रभारी भी रह चुके हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ योगी आदित्यनाथ और अन्य सभी नेताओं से उनका बेहतर तालमेल उनकी दावेदारी को मजबूत कर रहा है।     
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केशव मजबूत संघर्षशील नेता
केशव प्रसाद मौर्य भाजपा के जिताऊ चेहरे रहे हैं। 2017 में भाजपा की प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के समय वही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। ऐसे में माना यही जा रहा है कि 2027 में एक बार फिर भाजपा उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ओबीसी और ईबीसी वर्ग को अपने साथ जोड़ने की मजबूत कोशिश कर सकती है। कल्याण सिंह के करीबी माने जाने वाले बीएल वर्मा भी ओबीसी समीकरण को साधने के लिए भाजपा की पसंद बन सकते हैं। 

मायावती के सामने दलित अध्यक्ष...?
यूपी में भाजपा दलितों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की योजना बनाती है तो पार्टी के पूर्व दलित सांसद रामशंकर कठेरिया उसकी पहली पसंद बन सकते हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में दलितों के एक वर्ग के भाजपा से टूटने के कारण उसे लोकसभा में नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में पार्टी कठेरिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर दलितों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। जिस तरह मायावती एक बार फिर मजबूत होने की कोशिश कर रही हैं, भाजपा के लिए दलित मतदाताओं को साधे रहना अधिक आवश्यक हो गया है। कठेरिया इसमें पार्टी की मदद कर सकते हैं। 
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