यूपी चुनाव के तीसरे चरण में जिन इलाकों में चुनाव हो रहे हैं, उसे 'यादवलैंड' या मुलायम का गढ़ कहा जा रहा है। क्योंकि इन इलाकों में यादव मतदाताओं की संख्या अधिक है। हालांकि इस चरण में बीजेपी की भी स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। क्योंकि केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हैं। वहीं हिन्दु के फायर बिग्रेड नेता साक्षी महाराज का संसदीय क्षेत्र उन्नाव में भी चुनाव हो रहे हैं।
सेंट्रल यूपी में यादवलैंड के नाम से पहचाने जाने वाले 13 सीटों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इन सीटों पर न सिर्फ सियासी दिग्गज निगाहें लगाए हुए हैं बल्कि चुनाव आयोग का भी पहरा है। हालांकि, इस चरण का करीब 30% क्षेत्र शहरी है और 70% ग्रामीण इलाका है। दलितों की संख्या करीब 25% है और अल्पसंख्यक 16% के करीब हैं।
2012 के विधानसभा चुनाव में सपा ने इन इलाकों में जबरदस्त वापसी की। सपा को इन जनपदों में 55 सीटें मिली थी जबकि बसपा काफी नीचे गिरते हुए महज छह सीटों पर अटक गई थी। 2012 में भाजपा को भी छह सीटें मिले थे जबकि कांग्रेस को दो सीटें हासिल हुई थी।
बागी उम्मीदवार से परेशान अखिलेश
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ी चुनौती इटावा और आसपास के जिलों को बचाने की होगी। इस इलाके से कई जगह सपा से बागी उम्मीदवार मैदान में हैं और बीजेपी की पूरी कोशिश है सपा के किले को ढहा दिया जाए। अखिलेश ने इस बार इस इलाके के कई मौजूदा विधायकों का टिकट काट कर नए प्रत्याशियों पर भरोसा जताया।
मुलायम परिवार की ज्यादातर पुरानी रिश्तेदारी कन्नौज में है।क्योंकि कन्नौज से अखिलेश खुद सांसद रहे और अब डिंपल यादव सांसद हैं। सैफई परिवार की ज्यादातर पुरानी रिश्तेदारियां फर्रुखाबाद और कन्नौज में हैं। ऐसे में इन चारों जिलों के लोग मुख्यमंत्री के हर कदम पर खासतौर पर निगाह रखते हैं।
दूसरी तरफ इन सभी सीटों पर शिवपाल सिंह यादव के समर्थक माने जाने वाले सजातीय उम्मीदवार भी लोकदल सहित अन्य दलों के जरिए मैदान में डटे हैं। चुनावी बिसात पर इनकी पहचान अखिलेश विरोधी गुट के रूप में हो रही है। इस लिहाज से भी इन चारों जिले की 13 सीटों की चुनाव परिणाम सीधे तौर पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है।
साल 2012 में विधानसभा की स्थिति
voting
- फोटो : amar ujala
साल 2012 में विधानसभा की स्थिति
इटावा : साल 2012 में सभी तीन सीटें पर सपा का कब्जा
लखनऊ जनपद : साल 2012 में 9 सीटों में से 7 पर सपा, एक कांग्रेस, एक बीजेपी
कानपुर : साल 2012 में जिले की 10 सीटों में से पांच पर सपा, भाजपा चार पर और एक कांग्रेस की सीट
हरदोई : साल 2012 में हरदोई की 8 सीटों में 6 सीट पर सपा, बीएसपी को मिली दो सीट
कन्नौज : साल 2012 में तीनों सीटों पर सपा का कब्जा
मैनपुरी : साल 2012 में पांचों सीटों पर सपा का कब्जा
औरैया : साल 2012 में तीनों सीटों पर सपा का कब्जा
बाराबंकी : साल 2012 में छह सीटों में से पांच पर सपा और एक पर बीएसपी का कब्जा