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निष्पक्ष और जल्द न्याय दिलाना अभी दूर का सपना : मुख्य न्यायाधीश

Sun, 21 Aug 2016 04:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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चीफ जस्टिस जीएस ठाकुर
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सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर ने शनिवार को कहा कि मौजूदा स्थिति में निष्पक्ष और तीव्र न्याय दिलाना अभी दूर का सपना है। उन्होंने माना कि लोकतंत्र के तीसरे और मजबूत स्तंभ न्यायपालिका के सामने आज भी न्याय दिलाने को लेकर कई बड़ी चुनौतियां हैं।
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उन्होंने कहा कि जिस तरह से हमारा देश विकास के मोर्चे पर उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है, उसी तरह न्याय दिलाने वाली प्रणाली का विकसित होना जरूरी है लेकिन सामाजिक एवं आर्थिक असमानता वाले इस समाज में संवैधानिक उद्देश्यों को पूरा करना आसान नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि अदालत में पहुंचने से पहले मामलों को मध्यस्थता के जरिये सुलझाने का प्रयास होना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ठाकुर शनिवार को यहां हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 23वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के तीन स्तंभों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के सामने कई चुनौतियां हैं। आर्थिक विकास को यदि अलग रखें तो देश में साफ  पेयजल, न्यूनतम स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा और बेरोजगारी की समस्या गंभीर बनी हुई है। सरकारी क्षेत्र में रोजगार कम हुआ है।
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देश प्रगति के दौर से गुजर रहा है, न्यायपालिका को इसके मुताबिक ढालना होगा

चीफ जस्टिस जीएस ठाकुर - फोटो : getty
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के सामने लोगों को न्याय दिलाने में अलग तरह की चुनौतियां हैं। देश उल्लेखनीय प्रगति के दौर से गुजर रहा है, इसलिए न्यायिक व्यवस्था को इसके मुताबिक ढालना होगा। आने वाले वक्त में हमें विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता की प्रक्रिया को महत्व देना होगा, जैसा कि अन्य कई देशों में व्यवस्था है। दीवानी मामलों को आसानी से मध्यस्थता से निपटाया जा सकता है। अन्य देशों की तरह मध्यस्थता की अहम भूमिका हो सकती है। सभी सिविल मामलों के कोर्ट में जाने से पूर्व मध्यस्थता से निपटाना होगा। राज्य सरकारों को एडीआर सेंटर में पूरी तरह से प्रशिक्षित मीडिएटर तैनात करने होंगे।

भूमि सुधार प्रोजेक्ट आज भी अधूरा
सीजेआई ने कहा कि विधायिका के समक्ष आजादी के 70 साल बाद भी बड़ी चुनौती है। टैक्स, बैंकिंग, व्यापार नीति, टेलीकॉम, ढांचागत विकास में निवेश, कारपोरेट और अप्रत्यक्ष करों की नीतियों के साथ आज भारत विश्व के अन्य देशों से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। 70 करोड़ स्मार्ट फोन उपभोक्ता, 33.20 करोड़ इंटरनेट यूजर के अलावा देश में आधार कार्ड जैसी सुविधाएं और ऑनलाइन भुगतान जैसी सुविधाएं मोबाइल फोन से संभव हो रही हैं। लेकिन इसका एक स्याह पक्ष यह भी है कि 1950 में शुरू किया भूमि सुधार प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है।
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