संसद की कार्यवाही के दौरान इस्तेमाल होने वाले कई शब्दों को अब असंसदीय भाषा की श्रेणी में रखा गया है। विपक्ष, खासतौर से कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। पूर्व वित्त एवं गृह मंत्री रहे पी. चिदंबरम ने तो इन शब्दों का विकल्प भी सुझाया है। उन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा, अगर सरकार 'अक्षम' है, तो क्या इसे असंसदीय सरकार के रूप में वर्णित करना सही होगा। संसद ने किसी भी शब्द पर 'प्रतिबंध' नहीं लगाया है। संसद केवल आपकी सीमित शब्दावली का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। 'शर्मिंदा' न हों। यूं कहें कि आप सरकार के आचरण से 'आहत' हैं। सरकार को 'भ्रष्ट' मत कहो। यूं कहें कि उन्होंने लोगों के पैसे चुराए हैं।
सरकार के लिए होता रहा है इन शब्दों का इस्तेमाल
पूर्व गृह मंत्री एवं कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा, यदि जांच एजेंसियों द्वारा कानून का 'दुरुपयोग' किया जाता है, तो क्या उन पर असंसदीय व्यवहार का आरोप लगाना और उन्हें विशेषाधिकार समिति के समक्ष ले जाना सही होगा। संसद में अब शकुनि, तानाशाह, जयचंद, विनाश पुरुष, खालिस्तानी, जुमलाजीवी, जयचंद, अंट-शंट, भ्रष्ट, नौटंकी, ढिंढोरा पीटना और निकम्मा आदि शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। संसद की कार्यवाही के दौरान ये शब्द अमर्यादित माने जाएंगे। यानी अब इन्हें असंसदीय शब्दों की श्रेणी में डाल दिया गया है। संसद का मॉनसून सत्र, जो कि 18 जुलाई से शुरू हो रहा है, उससे पहले लोकसभा सचिवालय ने हिंदी और अंग्रेजी के ऐसे शब्दों की सूची जारी की है। विपक्षी दलों का कहना है कि जिन शब्दों को असंसदीय बताया गया है, उनका इस्तेमाल सरकार के लिए होता रहा है। विपक्षी दलों के नेता, इन शब्दों के जरिए सरकार पर प्रहार करते रहे हैं।
बिरला बोले- 1100 पन्नों का शब्दकोष पढ़े विपक्ष
गुरुवार को एक प्रेसवार्ता में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, संसद के द्वारा किसी भी शब्द पर बैन नहीं लगाया गया है। विपक्ष इस मुद्दे को तूल दे रहा है। उसे जानबूझकर गलतफहमी नहीं फैलानी चाहिए। महज, आपत्ति वाले शब्दों को ही संसद की कार्यवाही से हटाया गया है। जो शब्द हटाए गए हैं, वे ऐसे नहीं हैं कि विपक्ष ही उनका इस्तेमाल कर रहा है। सत्ता पक्ष की तरफ से भी वैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है। काला दिन, गुंडागर्दी, गुलछर्रा, गुंडों की सरकार, दोहरा चरित्र, तड़ीपार और तलवे चाटना आदि शब्द अब असंसदीय भाषा की श्रेणी में माने जाएंगे। बिरला ने कहा, उन्हें 1100 पन्नों का वह शब्दकोश पढ़ना चाहिए, जिसमें असंसदीय शब्द लिखे गए हैं। ऐसे असंसदीय शब्दों की सूची 1954, 1986, 1992, 1999, 2004, 2009, 2010 में जारी की गई थी। वर्ष 2010 के बाद से यह सूची अब हर वर्ष जारी की जाती है।
विपक्ष बोला- लोकतंत्र के लिए लड़ना है
कांग्रेस पार्टी के नेता एवं राज्यसभा सांसद, जयराम रमेश ने कहा- मोदी सरकार की सच्चाई दिखाने के लिए विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी शब्द अब असंसदीय माने जाएंगे। अब आगे क्या विषगुरु। राज्यसभा सांसद और आप नेता राघव चड्ढा ने अपने ट्वीट में लिखा, ये जानकर अच्छा लगा कि सरकार उन विशेषणों से अवगत है, जो उसके कामकाज का सटीक और सही वर्णन करते हैं। तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा, संसद का सत्र कुछ दिनों में आरंभ होगा। यह पाबंदी लगाने वाला आदेश है। अब हमें संसद में अपनी बात रखते हुए.. शर्मिंदा, विश्वासघात, भ्रष्ट, पाखंड, अक्षम आदि बुनियादी शब्दों का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। मैं इन शब्दों का इस्तेमाल करूंगा। लोकतंत्र के लिए लड़ना है।