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उन्नाव रेप कांड: इलाहाबाद HC में जज और सरकारी वकील के बीच कुछ यूं चली घंटों बहस

Fri, 13 Apr 2018 08:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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उन्नाव रेप कांड में भापजा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी को लेकर बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ और महाधिवक्ता के बीच करीब साढ़े तीन घंटे बहस हुई। इस दौरान कई बार कोर्ट का रुख काफी तल्ख नजर आया। महाधिवक्ता भी बचाव का रुख कायम रखते हुए अपनी बात पर अड़े रहे। वकीलों से ठसाठस भरे चीफ कोर्ट में कई बार ठहाके भी गूंजे। प्रस्तुत है कार्यवाही के प्रमुख अंश- 

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कोर्ट : आप बताइए सरकार विधायक को गिरफ्तार करना चाहती है या नहीं?
महाधिवक्ता : मैं कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। ऐसा बयान नहीं दे सकता। पुलिस जांच कर रही है। कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जैसा बताया जा रहा है, वैसा मामला नहीं है। मीडिया इस मामले को अलग रंग दे रही है।

कोर्ट: कोई रंग नहीं दे रहा है। ऐसी घटनाएं प्रदेश में रोज हो रही हैं। पीड़िता का अपहरण हुआ, उससे रेप किया गया। वह चीखती रही पर पुलिस ने कुछ नहीं किया। आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाए पीड़िता के पिता को ही जेल भेज दिया। आर्म्स एक्ट के आरोपी को जेल भेजा जा रहा है और रेप के आरोपी की गिरफ़्तारी के लिए जांच जरूरी है।
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महाधिवक्ता: हम कानून के मुताबिक जांच करेंगे। जांच अधिकारी पीड़िता का बयान दर्ज करेंगे, फिर जरूरत हुई तो गिरफ्तारी की जाएगी। हमें समय दिया जाए। हम जांच में तेजी लाने का आदेश देंगे।

कोर्ट: क्या आप हर मामले में ऐसा ही करते हैं। यदि ऐसा है तो अदालत में हर दिन गिरफ्तारी पर रोक के लिए इतनी याचिकाएं क्यों दाखिल होती हैं। आप बिना बात के गिरफ्तारी करते हैं। 376 (रेप) के मुकदमे में विधायक को गिरफ्तार करने के लिए और कितनी जांच करेंगे। एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच की है और प्रथम दृष्टया आरोपों को विश्वसनीय पाया है। 
कोर्ट: क्या विधायक एसएसपी आवास में सरेंडर करने गए थे।
महाधिवक्ता: यह टीवी न्यूज है। 

कोर्ट: आप की क्या जानकारी है। यह एक असामान्य मामला है। वह सरेंडर करने गया फिर भी आप उसे गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं।
कोर्ट: इस पूरे मामले से यह समझ में आ रहा है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।
कोर्ट: आप अपने अधिकारियों को कुर्बान करने को तैयार हैं। पुलिसवालों और डॉक्टरों पर कार्रवाई की है, मगर विधायक को गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं। एसआईटी की रिपोर्ट में आया है कि पुलिस और डॉक्टर आरोपी के हाथों खेल रहे हैं। उन्होंने साक्ष्य नष्ट किए। जब पीड़िता ने अपने हाथ से लिखकर तहरीर दी है तो फिर 161 का बयान क्यों जरूरी है।
महाधिवक्ता: मै कोई बयान नहीं दे सकता। अदालत कोई आदेश दे तो उसका पालन किया जाएगा, जो कुछ भी जरूरी है किया जाएगा।

कोर्ट: हमें आप से ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी। क्या आप ने सरकार से निर्देश प्राप्त किया है या महाधिवक्ता के तौर पर ऐसा कह रहे हैं।

गोपाल चतुर्वेदी (न्यायमित्र): संज्ञेय अपराध में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है। जांच जरूरी नहीं है। एसआईटी की प्राथमिक जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। गिरफ्तारी संभव है। इसके बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित करते हुए शुक्रवार को दो बजे आदेश सुनाने के लिए कहा है।

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