बता दें कि अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) अमेंडमेंट बिल 2019 (यूएपीए) जुलाई माह के दौरान सदन में पेश किया गया। लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद इसे राज्यसभा ने भी पास कर दिया। बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ कड़े कानून की जरूरत पर जोर दिया था। इस बिल में संगठनों के साथ-साथ आतंकी गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित किए जाने का प्रावधान है।
इस कानून की आवश्यकता पर बल देते हुए खुद गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में आतंकी यासीन भटकल का उदाहरण देते हुए कहा था कि एनआईए ने उसके संगठन इंडियन मुजाहिदीन को आतंकवादी संगठन घोषित किया था, मगर भटकल को आतंकवादी घोषित करने के लिए कानून में कोई प्रावधान नहीं था।
नए आतंकवाद-विरोधी कानून के तहत आतंकी संगठनों की संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं। इसके लिए जांच अधिकारी को संबंधित राज्य के डीजीपी की पूर्व अनुमति की जरूरत होगी। अगर मामले की जांच एनआईए का कोई अफसर कर रहा हो, तो संबंधित संपत्ति को जब्त करने के लिए संबंधित राज्य के डीजीपी की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए केवल एनआईए के महानिदेशक की मंजूरी ही काफी रहेगी।
मोदी सरकार ने इस बिल के जरिए आतंकियों को यह संदेश दिया था कि आतंकवाद पर वह जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी। गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून, 1967 में संशोधन किए जाने के एक महीने बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर कहा था कि मौलाना मसूद अजहर आतंकवाद में शामिल है। उक्त कानून के तहत मौलाना मसूद अज़हर को आतंकवादी के रूप में अधिसूचित किया जाता है। हाफिज सईद को वर्ष 2008 के दौरान मुंबई में हुए आतंकवादी हमले का मास्टरमाइंड, वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले और इसी साल पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
कानून पारित होने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, पाकिस्तान खुले तौर पर भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है। अगर इस्लामाबाद नई दिल्ली के साथ सहयोग करने के प्रति गंभीर है, तो उसे आतंकवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार उन लोगों को भारत को सौंप देना चाहिए, जो पाकिस्तान में रह रहे हैं। दोनों देशों के संबंधों पर उन्होंने कहा, 'कई वर्षों से यह संबंध मुश्किल भरे रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण आतंकवादी उद्योग विकसित किया है।
वह हमले करने के लिए आतंकवादियों को भारत भेजता है। एस जयशंकर ने कहा, मुझे बताएं कि कौन सा देश ऐसे पड़ोसी के साथ बातचीत करने के लिए तैयार होगा, जो उसके खिलाफ खुलेआम आतंकवाद को बढ़ावा देता है। हमें ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता है जो सहयोग करने की वास्तविक इच्छा प्रदर्शित करें। उन्होंने कहा कि उदाहरण स्वरूप, विभिन्न आतंकवादी गतिविधियों के लिए भारत के वांछित अपराधी पाकिस्तान में रह रहे हैं। हम पाकिस्तान से उन्हें सौंप देने को कह रहे हैं।