यूनाइटेड नागा काउंसिल ने 14 कुकी नागरिकों की रिहाई का फैसला रद्द कर दिया है। नागा संगठनों की मांग है कि पहले कुकी समूहों ने जिन 6 नागा युवाओं को अगवा किया है, उनका पता लगाया जाए। जनता के विरोध और पर्याप्त चर्चा न होने के कारण रिहाई की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।
मणिपुर में नागा जनजातियों की सबसे बड़ी संस्था, यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने सोमवार को एक बड़ा फैसला लिया। काउंसिल ने 14 कुकी नागरिकों की होने वाली रिहाई को रद्द कर दिया है। यह फैसला समुदाय के युवा नेताओं और अन्य पक्षों के बीच बढ़ते मतभेद को देखते हुए लिया गया है। नागा जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए रिहाई की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है।
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क्यो रद्द हुआ फैसला?
इन 14 कुकी नागरिकों को 13 मई को बंधक बनाया गया था। पहले की योजना के अनुसार, इन्हें एक जून को दोपहर 2 बजे रिहा किया जाना था। रिहाई के बाद इन्हें कांगपोकपी जिले ले जाने की तैयारी थी, जहां इनके स्वागत का कार्यक्रम रखा गया था। लेकिन नागा युवा समूहों और नागरिक संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि नागा बहुल जिलों के मुख्य लोगों से इस बारे में सही सलाह-मशविरा नहीं किया गया था।
सेनापति जिले में नागा संगठनों और छात्र निकायों के बीच कई घंटों तक बैठकें चलीं। इन बैठकों में यह मुद्दा उठा कि कुकी सशस्त्र समूहों ने छह नागा नागरिकों का अपहरण किया था। उन 6 लोगों का अब तक कुछ पता नहीं चला है। नागा समूहों का कहना है कि जब तक कुकी सशस्त्र समूह उन लापता युवाओं की स्थिति और ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं देते, तब तक कुकी बंधकों को नहीं छोड़ा जाएगा।
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इससे पहले, यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) और नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (NPO) ने इन 14 कुकी नागरिकों को छोड़ने का मन बना लिया था। यह फैसला बैपटिस्ट समुदाय, नागा चर्चों और अन्य आदिवासी संगठनों की अपील पर लिया गया था। इसके अलावा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो को भरोसा दिया था कि गृह मंत्रालय लापता नागा नागरिकों का पता लगाएगा। उन्होंने दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही थी।
मणिपुर सरकार ने भी आश्वासन दिया था कि उग्रवादी समूहों के साथ हुए समझौते के नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। सरकार ने उग्रवादी शिविरों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का वादा भी किया था। इन आश्वासनों के बाद ही रिहाई की बात चली थी, लेकिन अब स्थानीय विरोध के कारण इसे रोक दिया गया है।