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कांग्रेस-एनसीपी को विपक्ष में बैठने का जनमत तो कुर्सी के लिए मैच फिक्सिंग कैसे: भाजपा

Sat, 23 Nov 2019 03:22 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • महाराष्ट्र में बड़ा सियासी उलटफेर, भाजपा-अजित पवार ने बनाई सरकार
  • देवेंद्र फडणवीस दोबारा बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, अजित पवार उप मुख्य मंत्री बने
  • केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने प्रेस कांफ्रेंस कर विपक्ष को दिया जवाब
  •  कहा- चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना किसके इशारे पर उत्तेजक हो गई थी?
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Ravi Shankar Prasad - फोटो : Twitter
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विस्तार
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महाराष्ट्र में सियासी रस्साकस्सी के बीच भाजपा ने बाजी मारते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर सरकार बना ली है। देवेंद्र फडणवीस ने आज सुबह राजभवन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में दोबारा शपथ ली। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एनसीपी के अजित पवार को भी उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। 

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फडणवीस के शपथ ग्रहण के बाद विपक्ष की ओर से हो रही बयानबाजी पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने प्रेस कांफ्रेंस की। रविशंकर ने कहा कि, भाजपा और शिवसेना ने जब बहुमत प्राप्त किया तो ये भाजपा गठबंधन की नैतिक और चुनावी विजय थी। चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना किसके इशारे पर उत्तेजक हो गई थी?

-शरद पवार और कांग्रेस ने परिणाम के बाद बयान दिया था कि हमें विपक्ष में बैठने का जनमत मिला है। तो ये विपक्ष में बैठने का जनमत कुर्सी के लिए मैच फिक्सिंग कैसे हो गया था।
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-महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मैनडेट था भाजपा और शिवसेना, लेकिन बड़ी पार्टी थी भाजपा और मुख्यमंत्री का मैनडेट था योग्य और ईमानदार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी के लिए।

-कहा जा रहा है कि लोकतंत्र की हत्या की गई है। जब शिवसेना स्वार्थ भाव से प्रेरित होकर अपनी 30 साल की दोस्ती तोड़कर अपने घोर विरोधियों का दामन थाम ले तो ये लोकतंत्र की हत्या नहीं है क्या? और एक स्थाई सरकार के आग्रह पर देवेन्द्र फडणवीस की अगुवाई में अजीत पवार के साथ बड़ा तबका आकर सरकार को सहयोग करे तो इसे लोकतंत्र की हत्या कहा जाता है।

-जो आदरणीय बाला साहब ठाकरे के आदर्शों को जीवित नहीं रख सके उनके विषय में कुछ नहीं कहना है। उनका प्रमाणिक कांग्रेस विरोध जग जाहिर है, उनकी राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रवाद और भारत की संस्कृति-संस्कार के प्रति समर्पण प्रमाणिक है।

-कुछ लोग छत्रपति शिवाजी की विरासत की बात कर रहे हैं, उनसे मैं बस इतना कहूंगा कि सत्ता के लिए अपने विचारों से समझौता करने वाले तो कम से कम छत्रपति शिवाजी की बात न करें।

-राज्यपाल ने तीनों पार्टियों को बुलाया था। एनसीपी और शिवसेना को बुलाया तो उन्होंने कहा कि और समय दीजिए। आज सुबह भाजपा और अजीत पवार जी के साथ एनसीपी के तबके ने आवेदन दिया कि हमारे पास बहुमत है। क्या शिवसेना और एनसीपी का कोई आवेदन राज्यपाल के पास अब तक था?
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