फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'आपातकाल में लोकतंत्र को कमजोर किया गया': सोनिया गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री का तंज, इंदिरा पर उठाए सवाल

Sun, 08 Nov 2026 03:21 PM IST
नितिन गौतम आईएएनएस, मुंबई

सार

आपातकाल को लेकर दिए गए सोनिया गांधी के बयान की इन दिनों भारतीय राजनीति में खूब चर्चा है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी सोनिया गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया दी है और कांग्रेस नेता पर तंज कसा है। 
विज्ञापन
रामदास अठावले - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा हाल ही में आपातकाल के मुद्दे पर बात की गई, जिसमें उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी को एहसास था कि आपातकाल लगाने का उनका फैसला गलत था। सोनिया गांधी के इस बयान पर सियासत भी खूब हो रही है। भाजपा सोनिया गांधी पर हमलावर है। अब केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सहयोगी रामदास अठावले ने भी सोनिया गांधी के बयान पर सवाल उठाए हैं। सोनिया गांधी की ओर से आपातकाल को गलती बताए जाने पर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने तंज कसा है। 
विज्ञापन


क्या बोले केंद्रीय मंत्री
रामदास अठावले ने कहा, सोनिया गांधी ने अब स्वीकार किया है कि आपातकाल का फैसला संविधान के खिलाफ था और उस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। अठावले ने कहा, 'यह अलग बात है कि सोनिया गांधी ने कहा है कि इंदिरा गांधी को बाद में एहसास हुआ था कि आपातकाल लगाने का उनका फैसला गलत था। हालांकि, मुझे नहीं लगता कि इंदिरा गांधी ने खुद कभी ऐसा कोई बयान दिया था। लेकिन उस दौरान लोकतंत्र को कमजोर किया गया था। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'अगर सोनिया गांधी ने आज यह बात कही है, तो यह अच्छी बात है कि उन्होंने स्वीकार किया है कि इंदिरा गांधी का आपातकाल लगाने का फैसला सही नहीं था।' 

सोनिया गांधी ने क्या कहा था?
अपनी किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ़ लव' के लॉन्च से पहले सोनिया गांधी ने हाल ही में द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में आपातकाल पर बात की। इस बातचीत में सोनिया गांधी ने उस समय के हालात का जिक्र करते हुए कहा, 'इंदिरा गांधी तेजी से बिगड़ती परिस्थितियों से निपटने की कोशिश कर रही थीं। उस समय हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक परिवहन को आग के हवाले किया जा रहा था। बड़े पैमाने पर संगठित अशांति फैली हुई थी। यहां तक कि नौकरशाही और सशस्त्र बलों से सरकारी आदेशों की अवहेलना करने की अपील भी की गई थी।'
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि इमरजेंसी लगाने के फैसले का समाधान आखिरकार लोकतांत्रिक तरीके से ही निकाला गया। सोनिया गांधी ने कहा, 'आज पीछे मुड़कर देखने पर हम उन घटनाओं को बेहतर नजरिये से समझ सकते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि खुद इंदिरा गांधी ने हालात को समझा और मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया। आप अच्छी तरह जानते हैं कि उन्होंने बाद में सार्वजनिक रूप से इमरजेंसी के दौरान हुई ज्यादतियों पर खेद जताया और माफी भी मांगी थी।'
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें