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Ram Vilas Paswan Death: केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन, 74 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

Thu, 08 Oct 2020 10:21 PM IST
मुकेश कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रामविलास पासवान - फोटो : अमर उजाला
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Ram Vilas Paswan Death: केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया है। 74 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। इस बात की जानकारी उनके बेटे व लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान ने दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'पापा....अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं।'

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लंबे समय से चल रहे थे बीमार
रामविलास पासवान लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने राजनीति में एक लंबा समय बिताया है। रामविलास पासवान वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी इन सभी प्रधानमंत्रियों के ‘कैबिनेट’ में अपनी जगह बनाने वाले शायद एकमात्र व्यक्ति थे। 
 


1969 में पहली बार पहुंचे थे बिहार विधानसभा
राजनीति की नब्ज पकड़ने वाले रामविलास पासवान पहली बार 1969 में एक आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में बिहार विधानसभा पहुंचे थे। 1974 में राज नारायण और जेपी के प्रबल अनुयायी के रूप में लोकदल के महासचिव बने थे। वे व्यक्तिगत रूप से राज नारायण, कर्पूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा जैसे आपातकाल के प्रमुख नेताओं के करीबी रहे हैं।

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लगभग पांच दशक तक बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे

1946 में बिहार के खगड़िया में जन्मे रामविलास पासवान ने एक छोटे से इलाके से निकलकर दिल्ली की सत्ता तक का सफर अपने संघर्ष के बूते तय किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगभग पांच दशक तक वो बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे। 

‘मौसम वैज्ञानिक’ नाम से जाने जाते थे
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने लालू प्रसाद यादव ने रामविलास पासवान को ‘मौसम वैज्ञानिक’ का नाम दिया था। रामविलास पासवान हवा के रुख के साथ राजनीति के अपने फैसले बदलने में माहिर थे। इसमें वो कामयाब भी रहे। इसी का नतीजा रहा कि उन्होंने छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया। 

रामविलास ने ‘ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर’ को किया चरितार्थ
‘ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर’ इस कहावत को रामविलास पासवान ने चरितार्थ किया। वह बेहत सरल और मृदुभाषी थे। बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र से वह कई बार चुनाव जीते, लेकिन दो बार उन्होंने सबसे अधिक वोट से जीतने का रिकॉर्ड बनाया। 
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