गडकरी ने एमएसएमई सहित कई क्षेत्रों में नई सोच और नए आइडिया की कमी पर निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि नई सोच और नए आइडिया से हम एमएसएमई, पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। मुश्किल यह है कि हम वैश्विक मानकों को ध्यान में रखकर तैयारी नहीं कर पाते। यही कारण है कि हम बड़ी संभावनाओं को बड़े अवसर में बदलने में चूकते रहते हैं।
पर्यावरण के साथ विकास भी जरूरी
देश में की सड़क परियोजनाओं का काम तय समय में पूरा न होने को लेकर गडकरी ने निराशा जाहिर की। उत्तराखंड की चार धाम परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संबंधी आपत्तियों, स्थानिय लोगों के विरोध और एनजीओ की नाकारात्मक मानसिकता के कारण यह परियोजना कई बार बंद हुई।
ऐसे मामले में एक पक्ष अदालत से स्टे ले लेता है। पर्यावरण और विकास दोनों में सामंजस्य जरूरी है। हम एक पेड़ काटने की कीमत पर 10 पेड़ लगाने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद बार-बार आने वाली अड़चनों से परियोजनाएं समय से पूरी नहीं हो पा रहीं।
यमुना के रास्ते जलमार्ग से हो ताज का दीदार
अपने पहले कार्यकाल में वाराणसी से हल्दिया तक गंगा पर पानी का जहाज चलाने वाले नितिन गडकरी की इच्छा यमुना के रास्ते पर्यटकों को ताजमहल का दीदार कराने की है। गडकरी ने कहा कि देश में जल परिवहन के लिए असीम संभावनाएं हैं।
हम गंगा नदी के जरिए बांगलादेश तक व्यापार कर सकते हैं। ब्रह्मपुत्र के जरिए पूर्वोत्तर से चीन-म्यांमार तक ऐसा ही कर सकते हैं। जब मैंने गंगा में पानी का जहाज चलाने की बात कही थी तब भी लोगों ने व्यंग्य किया था। यही यमुना में भी हो सकता है।
लोग दिल्ली में पानी के जहाज पर बैठें और आगरा के ताजमहल के साथ इलाहाबाद के संगम तट तक आनंद लें, यह भी संभव है।