कृषि संबंधी तीन बिलों पर जारी विवाद के बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बृहस्पतिवार को विपक्ष के सभी आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, आवश्यक वस्तु अधिनियम से कृषि उपज को हटाने सहित बिल से जुड़े प्रावधानों की कांग्रेस समेत अन्य दल पहले पैरवी करते रहे हैं।
तोमर ने कांग्रेस पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी दल की यह राजनीति अंतत: देश को ही कमजोर करेगी।
कृषिमंत्री ने कहा, आवश्यक वस्तु अधिनियम तब लाया गया था, जब देश में अनाज का संकट था। अब देश में सरप्लस अनाज है। रखरखाव के अभाव में बड़ी मात्रा में अनाज सड़ रहे हैं। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इस अधिनियम से अनाज को बाहर करने का वादा किया था। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री खुद इसकी वकालत कर चुके हैं।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, स्वामीनाथन आयोग, किसान आयोग सभी ने इसी आशय का सुझाव अपनी रिपोर्ट में दिया था। अब जबकि मोदी सरकार ने इन सुझावों पर अमल करना शुरू किया है तो कांग्रेस राजनीति कर रही है।
तोमर ने कहा कि किसानों को मंडी की बाध्यता से आजाद करने की बात भी कांग्रेस ने कही थी। अभी पंजाब की मंडियों में किसानों को 8.5 फीसदी कर देना पड़ता है। इस बिल में किसानों को कहीं भी उपज बेचने की आजादी है। इसके अलावा बिना कर तीन दिन में हर हाल में भुगतान का प्रावधान तय किया गया है। हसलिए ये बिल किसान हितैषी हैं।
एमएसपी पर पलटवार
तोमर ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य देश में सांविधानिक व्यवस्था नहीं थी। यह प्रशासनिक निर्णय था। एमएसपी थी, है और रहेगा। सरकार ने रबी की फसल का एमएसपी घोषित कर सीधा संदेश दे दिया है। कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि दशकों तक इस देश पर शासन करने वाली पार्टी ने एमएसपी को कानूनी रूप से बाध्यकारी क्यों नहीं बनाया।
प्रावधान का विरोध नहीं
तोमर ने विपक्ष पर राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा, दोनों सदनों में बिल पर सात घंटे चर्चा हुई। विपक्ष के किसी सदस्य ने प्रावधान पर कोई सवाल नहीं उठाए। सवाल उन मामलों में उठाए गए, जो बिल का अंग ही नहीं था। ऐसे में साफ है कि विपक्ष भी बिल के प्रावधानों में कोई कमी नहीं ढूंढ पाया है।
कोरोना संकट के दौर में माल ढुलाई होगी प्रभावित : रेलवे
रेल विभाग ने कहा है कि कोरोना संकट के इस दौर में पंजाब में रेल रोके जाने से खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं की ढुलाई बुरी तरह प्रभावित होगी। इसके अलावा जरूरी विशेष यात्री ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित होगी।
अधिकारियों ने कहा कि पंजाब ने अगस्त में एफसीआई के 990 रेक अनाज की लोडिंग की, जबकि 23 सितंबर तक 816 रेक की लोडिंग हुई। इस तरह वहां रोजाना 35 रेक अनाज और 10 रेक खाद, सीमेंट, ऑटो और मिश्रित वस्तुओं की लोडिंग होती है।
ट्रेनें 26 तक निरस्त, कई परिवर्तित मार्ग से चलेंगी
पंजाब में रेल ट्रैक पर प्रदर्शन को देखते हुए रेलवे ने 26 सितंबर तक पंजाब की ओर जाने वाली कई ट्रेनों को निरस्त कर दिया है। कई ट्रेनों को अंबाला कैंट, सहारनपुर और दिल्ली स्टेशन पर ही टर्मिनेट किया जा रहा है।
किसान आंदोलन को देखते हुए अंबाला-लुधियाना, चंडीगढ़-अंबाला रेल रूट बंद कर दिया गया है। इस वजह से रेलवे ने करीब दो दर्जन ट्रेनों को निरस्त कर दिया है, परिवर्तित रूट से चलाई जा रही है।
हरिद्वार-अमृतसर जनशताब्दी, नई दिल्ली-जम्मूतवी स्पेशल राजधानी, अमृतसर-हरिद्वार जनशताब्दी, गोल्डन टेंपल, कर्मभूमि स्पेशल, बांद्रा-अमृतसर, सचखंड एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, सरयू-यमुना, धनबाद-फिरोजपुर, जयनगर-अमृतसर हमसफर एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें शनिवार तक निरस्त रहेंगी।
वहीं नांदेड़-अमृतसर ट्रेन पुरानी दिल्ली में खत्म होगी। वहीं 25 और 26 सितंबर को ट्रेन संख्या 02716 अमृतसर के बजाय पुरानी दिल्ली से चलेगी। इसके अलावा कई मालगाड़ियों के मार्ग में भी बदलाव किया गया है। कोरोना महामारी के कारण फिलहाल नियमित यात्री ट्रेन सेवा बंद है।