केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर मनसुख मांडविया ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य-संबंधी बुनियादी ढांचे का विस्तार, चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा और सभी को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रही है। मांडविया ने सोमवार को नई दिल्ली में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन क्षेत्रीय समिति के 76वें सत्र को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने समग्र और समावेशी दृष्टिकोण अपनाते हुए सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों के बारे जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना और वेलनेस केंद्रों की मदद से समाज के अंतिम छोर तक पहुंच रही है। अब तक देशभर के 21.10 करोड़ से ज्यादा लोग सरकार की योजनाओं से जुड़ चुके हैं। सत्र में मालदीव, तिमोर लेस्ते, श्रीलंका, नेपाल, कोरिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और भूटान के स्वास्थ्य मंत्री और प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सत्र में वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये जुड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया का क्षेत्र दुनिया की एक चौथाई से अधिक आबादी का घर है और इसे बीमारी के एक महत्वपूर्ण बोझ सेनिपटना भी होगा।
उन्होंने टीबी रोग अभियान के खिलाफ भारत की लड़ाई की सराहना करते हुए दूसरे देशों से भी सीख लेने और आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के 11 में से सात सदस्य देशों ने उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों को समाप्त करने में सफलता हासिल की है। इसी तरह बीमारियों के खिलाफ जमीनी स्तर पर काम करते हुए भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।