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MP Election: मध्यप्रदेश चुनावों की कमान अमित शाह के हाथ; क्या गृह मंत्री की बात मानेंगे राज्य के भाजपा नेता?

सार

अमित शाह चार घंटे के लिए भोपाल में थे। उन्होंने भाजपा के नेताओं और रणनीतिकारों से अपनी नाराजगी भी जाहिर की। पूरे होमवर्क के साथ आक्रामक चुनाव प्रचार की रणनीति के हिमायती शाह को अभी मध्यप्रदेश में पार्टी के भीतर वह सरगर्मी नहीं दिखाई दे रही है।
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अमित शाह - फोटो : PTI
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विस्तार
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव की कमान करीब-करीब अपने हाथ में ले ली है। वह भोपाल में विधानसभा चुनाव जीतने का मंत्र देकर लौटे हैं। इस मंत्र में भाजपा कर्नाटक वाली गलती नहीं दोहराना चाहती। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या गुटों में बंटे मध्यप्रदेश के भाजपा के नेता केंद्रीय गृहमंत्री की बात मानकर एकजुट हो जाएंगे?

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अमित शाह चार घंटे के लिए भोपाल में थे। उन्होंने भाजपा के नेताओं और रणनीतिकारों से अपनी नाराजगी भी जाहिर की। पूरे होमवर्क के साथ आक्रामक चुनाव प्रचार की रणनीति के हिमायती शाह को अभी मध्यप्रदेश में पार्टी के भीतर वह सरगर्मी नहीं दिखाई दे रही है। इसके लिए उन्होंने पार्टी के नेताओं को सुनाया। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री सभी से एकजुट होकर आपसी तालमेल के साथ चुनाव की तैयारी में उतरने का मंत्र दिया है। दरअसल, भोपाल से लेकर दिल्ली तक मध्यप्रदेश में नेताओं के बीच में चल रही गुटबाजी की चर्चा है। 

ग्वालियर चंबल संभाग में ज्योतिरादित्य सिंधिया का खेमा है तो राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने भविष्य के प्रति संवेदनशील रहते हैं। पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीज बड़े समय से बिना जिम्मेदारी के हैं। उनके पास किसी राज्य का प्रभार नहीं है। उनका शिवराज सिंह चौहान से रिश्ता सभी को पता है। मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा की भी यही स्थिति हैं। 
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वीडी शर्मा और शिवराज सिंह चौहान के रिश्ते के बारे में कहा जाता है कि निभती कम है। शिवराज को मध्यप्रदेश में बदले जाने की अफवाह को लेकर शिवराज के समर्थक वीडी शर्मा के करीबियों को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है कि क्या मध्यप्रदेश के नेताओं के बीच में चल रही गुटबाजी खत्म हो सकेगी?

कर्नाटक में अपनी हार का जिम्मेदार गुटबाजी को ही मानती है भाजपा 
कर्नाटक में हार की समीक्षा में भाजपा के नेता 'ज्यादा जोगी और मठ उजाड़े' की कहावत को ही सच मानते हैं। दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि यदि बीएस येदियुरप्पा राज्य के मुख्यमंत्री बने होते तो वहां इतनी खराब हालत न होती। बताते हैं के एस ईश्वरप्पा, जनार्दन रेड्डी बंधु, जदगीश शेट्टार समेत अपने तमाम नेताओं में बने तालमेल के अभाव ने ही भाजपा को हरा दिया।

शिवराज के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा चुनाव
भोपाल से लेकर दिल्ली तक अब साफ हो रहा है कि मध्यप्रदेश का आगामी विधानसभा चुनाव शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में लड़ा जाएगा। वह राज्य के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। अंतिम दौर में पार्टी अपने प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी किसी बड़े बदलाव के मूड में नहीं दिखाई दे रही है। कल जब अमित शाह भोपाल में अहम बैठक कर रहे थे तो इसमें मध्यप्रदेश के प्रभारी भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय रेल और दूर संचार मंत्री अश्विन वैष्णव, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रह्लाद पटेल, भाजपा के सह संगठन महासचिव शिव प्रकाश, मध्यप्रदेश -छत्तीसगढ़ के प्रभारी अजय जामवाल, वीडी शर्मा समेत अन्य मौजूद थे।

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