जानकारी के अनुसार, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी संक्रमण से प्रभावित जिलों की सूची जारी की है। इन 347 में 38 जनजातीय, 27 खनन और 46 आकांक्षी जिले भी शामिल हैं जिन्हें कम विकसित जिला माना जाता है।
टीबी मुक्त भारत के लिए केंद्र सरकार ने देश में अति प्रभावित जिलों की सूची जारी की है। विभिन्न राज्यों के 347 जिलों में टीबी के मामले और मृत्यु दर सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। बीते 46 दिन में यहां टीबी के 1.28 लाख नए मरीजों की पहचान हुई है जिन्हें अब तक लापता की श्रेणी में रखा गया था।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार, सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य सचिवों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी संक्रमण से प्रभावित जिलों की सूची जारी की है। इन 347 में 38 जनजातीय, 27 खनन और 46 आकांक्षी जिले भी शामिल हैं जिन्हें कम विकसित जिला माना जाता है। जिलों की पहचान करने के बाद केंद्र ने राज्यों की सहायता से यहां बीते सात दिसंबर 2024 से लेकर इस साल 23 जनवरी के बीच 3,81,843 निक्षय शिविर आयोजित किए जिनमें 4.48 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसकी जांच में 1,26,380 लोग टीबी से संक्रमित पाए गए। अब सरकार ने इन क्षेत्रों में 836 निक्षय वाहन दौड़ना शुरू किया है जो संदिग्धों की जांच कर रोगियों की पहचान करेंगे।
इस साल नहीं मिलेगा टीबी का टीका : आईसीएमआर
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि टीबी रोधी टीका को लेकर भारत में अलग अलग योजनाओं पर काम किया जा रहा है। बीसीजी टीका का परीक्षण अभी चल रहा है जिसे पूरा करने में करीब एक से दो वर्ष तक का समय लग सकता है। फिलहाल टीबी का टीका आने के लिए कुछ और साल का इंतजार करना पड़ सकता है।
विज्ञापन
15 से 1.5 लाख पर आए लापता रोगी
टीबी संक्रमण के खिलाफ अभियान में तेजी लाने से कई बड़े बदलाव नजर आ रहे हैं। जहां 2015 तक भारत में हर साल करीब 15 लाख टीबी मरीज सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से दूर थे अब ऐसे मरीजों की संख्या घटकर 1.50 लाख रह गई है। इसे और कम करने के लिए निक्षय वाहन, निक्षय शिविर के अलावा पैथो डिटेक्टर स्वदेशी तकनीक को 8293 प्रयोगशालाओं में स्थापित किया है।