केंद्र सरकार ने उस खाते के प्रबंधन को दोबारा व्यवस्थित किया है, जिसका इस्तेमाल विदेशी सेना बिक्री कार्यक्रम (एफएमएस) के तहत अमेरिका को भुगतान करने में किया जाता था। सरकार को एक समीक्षा के दौरान पता चला कि इस खाते में यह रकम जमा होते-होते 2.3 अरब डॉलर यानी 130 अरब रुपये के करीब पहुंच गई है और इस पर कोई ब्याज नहीं मिल रहा है। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने यह जानकारी दी है।
परिकर ने कहा कि खरीद-बिक्री के हरेक मामले में हर तिमाही बिल तैयार करने की बजाय भारत और अमेरिका ने फॉरेन मिलिट्री सेल्स प्रोग्राम (एफएमएस) को दुरुस्त किया है। इसके तहत एक फंड बनाया गया है। रक्षा सूंत्रों के मुताबिक, यह फंड पिछले साल सितंबर में बना था। इसके तहत जब कोई करार होता है तो कोष से राशि निकाल ली जाती है। लेकिन अमेरिकी सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद बने इस फंड से वित्त वर्ष 2015-16 की आखिरी दो तिमाही में कोई भुगतान नहीं किया गया। इस वजह से इसमें रकम जमा होती रही औैर अब यह 2.3 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, कोष में 2.3 अरब डॉलर जमा हैं। ऐसे में जब तक ये पैसे खत्म नहीं हो जाते, उसमें नई राशि डालने की जरूरत नहीं पडे़गी। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में रक्षा बजट पेंशन संबंधी आवंटन छोड़कर 2.59 लाख करोड़ रुपये हैं, जो मंत्रालय की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त हैं। उन्होंने कहा कि अगले कुछ महीनों में एक लाख करोड़ के समझौतों पर बात बन सकती है।