हथियारों, विमानों, सैन्य साजोसामान के लिए कितना बजट?
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को संसद में आम बजट पेश किया। इसमें पूंजीगत व्यय के लिए कुल 1.62 लाख करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। इनमें नए हथियार, विमान, युद्धपोत और अन्य सैन्य साजोसामान की खरीद शामिल है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2022-23 में, पूंजी परिव्यय के लिए बजटीय आवंटन 1.52 लाख करोड़ रुपये था, लेकिन संशोधित अनुमान के अनुसार व्यय 1.50 लाख करोड़ रुपये था।
वेतन-भुगतान के लिए कितना बजट आवंटित?
अगले वित्त वर्ष के बजट दस्तावेजों के अनुसार, राजस्व व्यय के लिए 2,70,120 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जिनमें वेतन भुगतान और प्रतिष्ठानों के रखरखाव पर होने वाले खर्च शामिल हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में राजस्व व्यय के लिए बजटीय आवंटन 2,39,000 करोड़ रुपये था। 2023-24 के बजट में, रक्षा मंत्रालय (सिविल) के लिए पूंजीगत परिव्यय 8,774 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि पूंजीगत परिव्यय के तहत 13,837 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।
रक्षा पेंशन के लिए अलग से 1,38,205 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। पेंशन परिव्यय सहित कुल राजस्व व्यय 4,22,162 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, रक्षा बजट का कुल आकार 5,93,537.64 करोड़ रुपये है।
पाकिस्तान के मुकाबले भारत का बजट कितना?
पाकिस्तान ने 2022-23 के लिए रक्षा बजट 1 लाख 52 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपया (PKR) रखा है। भारत की करेंसी के हिसाब से यह 46 हजार 689 करोड़ रुपये के बराबर है। इस लिहाज से देखा जाए तो भारत का रक्षा बजट (5.94 लाख करोड़ रुपये) पाकिस्तान से 13 गुना ज्यादा है। भारत में सिर्फ रक्षा सेवाओं और प्रशासनिक खर्चों (तनख्वाह, पेंशन) को ही जोड़ लिया जाए, तो यह पाकिस्तान के रक्षा बजट के मुकाबले करीब नौ गुना है।
चीन के मुकाबले कहां खड़ा है भारत?
दूसरी तरफ चीन की बात की जाए तो उसका बजट हर साल मार्च में आता है। चीनी रक्षा मंत्रालय के लिए पिछले साल कम्युनिस्ट पार्टी ने 1.45 ट्रिलियन युआन यानी भारतीय रुपये में 18 लाख 77 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह भारत के मुकाबले रक्षा पर तीन गुना खर्च है। हालांकि, अगर रक्षा बजट में बढ़ोतरी के आंकड़ों को देखा जाए तो भारत ने इस बार अपने रक्षा बजट को 12.95 फीसदी बढ़ाया है, जबकि चीन ने पिछली बार अपने बजट को सिर्फ 7.1 फीसदी ही बढ़ाया था।
आंतरिक सुरक्षा
आंतरिक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए गृह मंत्रालय (एमएचए) को 1,96,034.94 करोड़ रुपये आवंटित किए। पिछले बजट में यह आवंटन 1.85 लाख करोड़ रुपये था। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा, पुलिस के बुनियादी ढांचे और आधुनिकीकरण के लिए भी पर्याप्त राशि आवंटित की गई है।
सीएपीएफ को 1.27 लाख करोड़
बीते वित्त वर्ष 1.19 लाख करोड़ की तुलना में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) को 1.27 लाख करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इसमें से सीआरपीएफ को 31,772.23 करोड़, बीएसएफ को 24,771.28 करोड़, सीआईएसएफ को 13,214.68 करोड़, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को 8,329.10 करोड़, आईटीबीपी को 8,096.89 करोड़, असम राइफल्स को 7,052.46 करोड़, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) को 1,286.54 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) को 3,418.32 करोड़ रुपये, विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) को 433.59 करोड़, दिल्ली पुलिस को 11,662.03 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।