तोमर ने कहा कि हमने किसानों के पास एक प्रस्ताव भेजा था। वे चाहते थे कि कानून निरस्त कर दिए जाएं। हम ये कह रहे हैं कि सरकार खुले दिमाग के साथ उन प्रावधानों पर बातचीत करने के लिए तैयार है जिन पर किसानों को आपत्ति है। ये कानून एपीएमसी या एमएसपी को प्रभावित नहीं करते हैं। हमने यह बात किसानों को समझाने की कोशिश की। एमएसपी चलती रहेगी। रबी और खरीफ की खरीद अच्छे से हुई है। एमएसपी को डेढ़ गुना किया गया है, खरीद की वॉल्यूम भी बढ़ाया गया है। एमएसपी के मामले में उन्हें कोई शंका है तो इसे लेकर हम लिखित में आश्वासन देने को तैयार हैं। वार्ता के दौरान कई लोगों ने कहा कि किसान कानून अवैध हैं क्योंकि कृषि राज्य का विषय है और केंद्र सरकार ये नियम नहीं बना सकती है। हमने स्पष्ट किया कि हमारे पास व्यापार पर कानून बनाने का अधिकार है और उन्हें इसके बारे में विस्तार से बताया।
हमने किसानों की समस्याओं को लेकर उनके साथ पूरा संवाद करने की कोशिश की। कई दौर की वार्ताएं कीं। लेकिन उनकी ओर से कोई सुझाव आ ही नहीं रहा था। उनकी एक ही मांग है कि कानूनों को निरस्त कर दो। हम उनसे पूछ रहे हैं कि कानूनों में किन प्रावधानों से किसानों को समस्याएं हैं। लेकिन इस बारे में भी उन्होंने कुछ नहीं किया तो हमने ही ऐसे मुद्दे ढूंढे और उन्हें भेज दिए। जिन प्रावधानों पर किसानों को आपत्ति है सरकार उनका समाधान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जमीन विवाद पर हमने प्रावधान किया था कि एसडीएम को 30 दिन में विवाद का निपटारा करना होगा। लेकिन उन्हें लगता है कि अदालत में जाने की सुविधा होनी चाहिए। तो हमने प्रस्ताव रखा है कि हम किसान को इसका विकल्प दे सकते हैं।
तोमर ने कहा कि टैक्स के मुद्दे पर भी हम विचार करने को तैयार हैं। हमने प्रस्ताव दिया कि राज्य सरकार निजी मंडियों की व्यवस्था भी लागू कर सकेगी और राज्य सरकार निजी मंडियों पर भी टैक्स लगा सकेगी। एक्ट में यह प्रावधान था कि पैन कार्ड से ही खरीद हो सके। सरकार सोचती थी कि व्यापारी और किसान दोनों इंस्पेक्टर राज और लाइसेंसी राज से बच सकें। लेकिन उन्हें ऐसा लगता है कि पैन कार्ड तो किसी के भी पास होगा और कोई भी खरीद कर सकेगा तो ऐसे में हम क्या कर सकेंगे। इस आशंका को दूर करने के लिए हमने प्रस्ताव रखा कि राज्य सरकारों को पंजीयन के नियम बनाने की शक्ति दी जाएगी।
तोमर ने कहा कि ऐसा कहा जा रहा है कि किसानों की जमीन पर उद्योगपति कब्जा कर लेंगे। गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग लंबे समय से चल रही है लेकिन कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिला है कि किसी उद्योगपति ने किसान की जमीन पर कब्जा कर लिया हो। फिर भी हमरे कानून में प्रावधान बनाया है कि इन कानूनों के तहत होने वाला समझौता केवल किसानों की उपज और खरीदने वाले के बीच होगा। इन कानूनों में किसान की जमीन को लेकर किसी लीज या समझौते का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। तोमर ने कहा कि पूरा देश इस बात का गवाह रहा है कि स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट साल 2006 में आई थी। इस रिपोर्ट में एमएसपी को डेढ़ गुना बढ़ाने की सिफारिश तब तक लागू नहीं की गई जब तक नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे लागू नहीं किया।
कृषि मंत्री ने कहा कि कानून यह सुनिश्चित करता है कि अगर किसान और खरीदार के बीच कोई समझौता होता है और फसल इस तरह की है कि किसान की जमीन पर कोई ढांचा तैयार करना हो तो समझौता समाप्त होने के बाद उसे उस ढांचे को हटाना पड़ेगा। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उस जमीन पर बने ढांचे का मालिक किसान हो जाएगा। इस बात का प्रावधान कानून में किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसान की जमीन का मालिक वह खुद ही रहेगा और अगर ऐसी स्थिति आती है कि जिसके साथ उसने समझौता किया था वह नियम का पालन नहीं करता है तो हमने वह स्थिति भी किसानों के हित में ही रखी है। वहीं, पीयूष गोयल ने कहा कि कुछ चिंताएं ऐसी थीं कि किसान अपनी उपज को निजी मंडियों में बेचने के लिए मजबूर होगा। यह बिल्कुल गलत है, कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
कृषि मंत्री ने कहा कि एमएसपी के मामले पर सामान्य तौर पर चर्चा होती रहती है, लेकिन एमएसपी का इन कानूनों से कोई संबंध नहीं है। प्रधानमंत्री ने भी और मैंने खुद भी राज्य सभा और लोकसभा में पूरे देश के किसानों को आश्वासन दिया है कि एमएसपी वैसे ही जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून पूरा खराब और प्रतिकूल नहीं हो सकता। सरकार बहुत जोर देकर यह कहना चाहती है कि कानून का वह प्रावधान जो किसान के लिए प्रतिकूलता पैदा करता हो, जिसमें किसान का नुकसान दिख रहा हो, उस प्रावधान पर सरकार खुले मन से विचार करने के लिए पहले भी तैयार थी और आगे भी तैयार रहेगी, चर्चा के रास्ते खुले हुए हैं। आज की प्रेसवार्ता का उद्देश्य यही है कि सरकार वार्ता के लिए पूरी तत्पर है। मुझे आशा है कि रास्ता निकलेगा, हमें आशावान रहना चाहिए।
तोमर ने कहा कि किसानों को हमने प्रस्ताव दिया। यह किसानों की सरकार के साथ हो रही चर्चा के दौरान तय किया गया था। प्रस्ताव मं जो भी विषेय थे वो सभी विषय उसी चर्चा के निचोड़ थे। मैं किसानों से आग्रह करता हूं कि उस पर भी चर्चा करने की कोई जरूरत है तो जरूर आएं। किसानों को आंदोलन का रास्ता छोड़ना चाहिए। जब चर्चा चल रही है तो आगे के आंदोलन की घोषणा ठीक नहीं। जब वार्ता का क्रम टूट जाए तब आंदोलन उचित है। मेरा आग्रह है कि आंदोलन वापस लें और वार्ता के जरिए समस्याओं का समाधान ढूंढें। पीयूष गोयल ने कहा कि हम मानते हैं कि किसानों को कुछ मुद्दों पर चिंता है और हम इसका सम्मान करते हैं और जैसा कि हमने कहा कि इन चिंताओं के समाधान के लिए हम चर्चा के लिए तैयार हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को ऐसा लगता है कि बिजली का कोई एक्ट आ रहा है जो किसानों के लिए थोड़ी तकलीफ पैदा करेगा। राज्य सरकारें बिजली वितरण कंपनियों को वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ही, सब्सिडी की राशि हस्तांतरित करने की व्यवस्था संशोधन विधेयक में भी रहेगी। जैसा चल रहा है वैसा ही चलेगा। उन्होंने कहा कि हम लोगों ने उनको एक पूरा प्रपोजल बनाकर कल दिया था। उनके सारे प्रश्नों का उत्तर देने के बाद भी अंत में वे लोग किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रहे हैं इसका मेरे मन में बहुत कष्ट है। किसान बहनों और भाईयों से आग्रह करता हूं कि आप सबने चर्चा के दौरान जो प्रश्न उठाए थे उनका समाधान करने के लिए लिखित प्रस्ताव भारत सरकार ने आपके पास भेजा है। आप उन पर विचार करें और आपकी तरफ से जब भी चर्चा के लिए कहा जाएगा भारत सरकार एकदम चर्चा के लिए तैयार है।
तोमर ने पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमले की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाजपा अध्यक्ष का कार्यक्रम प्रायोजित था, राज्य सरकार को इसकी जानकारी थी। आज उनके काफिले पर पथराव किया गया। काफी समय से ध्यान में आ रहा है कि बंगाल में ऐसी हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसी घटनाएं आम तौर पर देखने को नहीं मिलतीं लेकिन बंगाल में ये घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इस स्तर तक बढ़ गई हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की गाड़ी पर पथराव हो रहा है और सरकार मौन साधे हुए हैं। मैं इस घटना की निंदा करता हूं और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करता हूं। वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह जेपी नड्डा पर हमला नहीं है बल्कि भारत की समृद्ध संस्कृति पर हमला है।