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UPS: पेंशन देने का वादा कितना चुनावी, पेंशन मिलने के बाद भी क्यों नाराज हैं कर्मचारी?

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 25 Aug 2024 05:38 PM IST

सार

माना जा रहा है कि सरकार ने एनपीएस से होने वाले नुकसान का अनुमान लोकसभा चुनाव 2024 के पहले ही लगा लिया था, लेकिन यह नुकसान कितना व्यापक हो सकता है, इसका उसे अनुमान नहीं था।
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यूपीएस से नाखुश सरकारी कर्मी। - फोटो : अमर उजाला


दरअसल, माना जा रहा है कि सरकार ने एनपीएस से होने वाले नुकसान का अनुमान लोकसभा चुनाव 2024 के पहले ही लगा लिया था, लेकिन यह नुकसान कितना व्यापक हो सकता है, इसका उसे अनुमान नहीं था। इस गफलत के पीछे सबसे बड़ा कारण यही रहा कि इसके पहले कई कठोर निर्णय के बाद भी उसे जनता का साथ मिलता रहा और उसने बड़ी जीत हासिल करने में सफलता पाई थी। 


किसान आंदोलन ऐसे मामलों में सबसे ऊपर रखा जा सकता है। तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में जहां किसानों ने सड़कों पर जाम लगा रखा था, वहीं सरकार इसे पीछे न लेने पर अड़ी हुई थी। इसी दौर में सरकार को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का सामना करना पड़ा। किसान संगठनों ने दावा किया था कि सरकार को इन आंदोलनों के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ेगा, लेकिन सरकार को किसान आंदोलनों के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, उलटे उसने पंजाब छोड़कर सभी चार राज्यों में सरकार बनाने में सफलता पाई थी। 


राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडेय का कहना है कि इस तरह के कड़े विरोध प्रदर्शन के बाद भी राजनीतिक सफलता पाने से कहीं न कहीं सरकार के मन में यह भाव पैदा हो गया कि जनता का उसे व्यापक स्तर पर समर्थन हासिल है, इसलिए वह कोई भी कड़ा कदम उठा सकती है। लेकिन ऐसा सोचते समय सरकार ने यह नहीं सोचा कि लोगों के बीच जनमत का निर्माण करने में सरकारी कर्मचारी बड़ी भूमिका निभाते हैं। वे चुनाव संचालन की प्रक्रिया को भी निचले स्तर पर प्रभावित करते हैं। संभवतः यही कारण है कि जब सरकारी कर्मचारियों ने सरकार का साथ नहीं दिया, उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा। 


चुनाव के कारण हुआ है यह निर्णय

वहीं, कुमार राकेश का मानना है कि सरकार अभी से 2029 की तैयारी में जुट गई है। सरकार के सामने हरियाणा, जम्मू-कश्मीर के चुनाव हैं। इसके बाद उसे महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों का सामना करना है। अभी तक के जो समीकरण सामने दिखाई दे रहे हैं, उसमें भाजपा को हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और दिल्ली में बेहद कड़ी चुनौती मिलने वाली है। 


यदि इन राज्यों में भाजपा को करारी मात मिलती है तो इससे विपक्ष के हौसले बुलंद होंगे, जो उसे 2029 की लड़ाई में कमजोर करेंगे। जबकि यदि सरकार की यूपीएस स्कीम से सरकारी कर्मचारी संतुष्ट हो जाते हैं, तो इससे वह न केवल चुनावी दौड़ में वापस लौट सकती है, बल्कि कुछ जगहों पर मजबूत लड़ाई में वापसी भी कर सकती है। संभवतः यही कारण है कि सरकार ने इस समय यूपीएस लाने का निर्णय किया है। 


लेकिन विरोध बरकरार

यूपीएस देने के बाद भी कर्मचारी संगठनों की सरकार से नाराजगी बरकरार है। केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के संगठन इप्सेफ के राष्ट्रीय सह महासचिव डॉ. अतुल मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि नई पेंशन देने के लिए सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन से ही दस फ़ीसदी अंशदान लेने का निर्णय कर लिया है। ऐसे में यह सरकारी कर्मचारियों के ऊपर बड़ा बोझ है। 
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उन्होंने कहा कि महंगाई के चलते पहले ही वेतन बहुत कम है, यदि उसमें से दस पफ़ीसदी पेंशन के नाम पर कम कर दिया जाएगा, तो इससे कर्मचारियों के लिए घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। यही कारण है कि उनके संगठन ने सरकार के इस कदम का विरोध करने का निर्णय किया है। वे सरकार के सक्षम लोगों से मिलकर यह मांग उठाना चाहते हैं, लेकिन यदि सरकार ने मांगें नहीं मानी, तो वे सरकार का विरोध करने के लिए बाध्य होंगे। यानी यूपीएस की घोषणा करने के बाद भी सरकार की मुश्किलें फिलहाल कम होती दिखाई नहीं दे रही हैं।
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