देश में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में कई विश्वविद्यालयों के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच यूनिसेफ ने बृहस्पतिवार को दुनियाभर की सरकारों से बच्चों को विरोध करने का अधिकार देने की अपील की है। साथ ही अपने सदस्य देशों से हिंसा से दूर रहने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा है। यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोरे ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन समेत शांतिपूर्ण सभा करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बच्चों का अधिकार है।
यह बाल अधिकारों पर कन्वेंशन में निहित है जोकि दुनिया में सबसे व्यापक रूप से पुष्टि मानवाधिकार संधि है। इसका पालन सुनिश्चित करना सदस्य देशों के लिए अनिवार्य है कि बच्चे अपने अधिकार का इस्तेमाल शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से कर सकें। बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की संस्था का यह बयान वैश्विक स्तर पर युवा प्रदर्शनकारियों पर अंकुश लगाने की विभिन्न सरकारों की निंदा माना जा रहा है।
देश में जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में भी यह बयान महत्वपूर्ण है।
भ्रष्टाचार के खात्मे, रोजगार की मांग को लेकर प्रदर्शन
हेनरीटा ने कहा कि मध्य पूर्व से लैटिन अमेरिका और कैरेबियन तक और यूरोप, अफ्रीका तथा एशिया में हर विरोध प्रदर्शन अपने आप में अलग है। युवा जलवायु संकट से निपटने के लिए कदम उठाने, भ्रष्टाचार और असमानता के खात्मे, बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों और सभी जगह, सभी के लिए न्यायपूर्व विश्व की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
युवाओं को उनके अधिकारों से किया जा रहा वंचित
यह हृदय विदारक विडंबना है कि अपने मौलिक अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे बच्चों और किशोरों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। इनमें से कई विरोध प्रदर्शनों में शामिल कुछ युवा प्रदर्शनकारियों को जेल में बंद कर दिया तो कुछ घायल हुए। यहां तक कुछ मारे भी गए। इतना ही नहीं, कई स्कूलों को बंद कर दिया गया और सार्वजनिक सेवाओं को ठप कर दिया गया। इन सबको देखते हुए हेनरीटा ने देशों से आग्रह किया कि वे बच्चों को विरोध करने का अधिकार दें और उन्हें सिद्धांतवादी, रचनात्मक और सहयोगात्मक तरीके से प्रतिक्रिया दें।