संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आकांक्षी जिला योजना की जमकर तारीफ की है। यूएनडीपी ने अपनी रिपोर्ट में इस योजना को स्थानीय क्षेत्र विकास के लिए इसे बेहद सफल मॉडल बताया है। साथ ही कहा है कि जिन देशों में क्षेत्रीय भेदभाव हैं यह मॉडल उनके लिए काफी उपयोगी है।
यूएनडीपी के भारतीय प्रतिनिधि शोको नोडा ने यह रिपोर्ट में नीति आयोग के उपाध्यक्ष और सीईओ डॉ राजीव कुमार को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले उपेक्षित और माओवादी चरमपंथ से प्रभावित दूरदराज के जिलों का ‘आकांक्षी जिला कार्यक्रम’ के तहत ठोस प्रयासों के कारण पिछले तीन सालों में अच्छा विकास हुआ है। इस यात्रा में जरूर कुछ बाधा आई, लेकिन पिछड़े इलाकों में तेजी से विकास हुआ।
यूएनडीपी ने पांच मुख्य विषयों- स्वास्थ्य एव पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, बुनियादी ढांचा, कौशल विकास एवं आर्थिक समावेषण के आधार पर इसका विश्लेषण किया है। साथ ही कहा कि इस कार्यक्रम ने इन जिलों के विकास के लिए उत्प्रेरक का काम किया है। इस रिपोर्ट में इस कार्यक्रम को चलाने वाले भारत के शीर्ष नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता की सराहना की गई है।
चंदौली और सोनभद्र जिले का भी कायाकल्प
प्रतिस्पर्धी और गतिमान संस्कृति को बढ़ावा मिलने से ऐसे कई जिलों में का कायाकल्प हुआ है, जो काफी पिछड़े थे। इनमें यूपी के चंदौली और सोनभद्र, झारखंड के सिमडेगा, मध्य प्रदेश के राजगढ़ आदि जिले शामिल हैं।
पीएम मोदी ने 2018 में शुरू की थी योजना
आकांक्षी जिला कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2018 में शुरू किया था। सरकार का मकसद था ‘सबका साथ सबका विकास’। जिसके तहत बेहद पिछड़े जिलों के लोगों का जीवन स्तर उठाने के साथ-साथ सबका समावेशी विकास सुनिश्चित करना था।