संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने कहा कि वे गर्म होती धरती पर शीघ्र कार्रवाई करें क्योंकि जलवायु संकट नाटकीय रूप से बिगड़ रहा है। 2015 में, ऐतिहासिक पेरिस समझौते के हिस्से के रूप में, दुनिया के देश पूर्व-औद्योगिक काल से वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक सीमित करने की कोशिशों पर सहमत हुए। 1800 के दशक के मध्य से यह पहले ही लगभग 1.1 डिग्री सेंटीग्रेड गर्म हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र ने विश्व निकाय ने ताजा रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल वार्मिंग पर अंकुश लगाने की अपनी 2015 के संकल्प से दुनिया अभी बहुत दूर है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई, सभी के लिए रहने योग्य और टिकाऊ भविष्य को सुरक्षित करने के अवसर की खिड़की तेजी से बंद हो रही है। दुनिया को गर्मी रोकने वाली गैसों के उत्सर्जन में 2019 के स्तर की तुलना में 2030 तक 43 फीसदी और 2035 तक 60 फीसदी की कटौती करनी होगी। संयुक्त राष्ट्र की इस नई रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों को जल्दी और गहराई के साथ बदलना होगा।
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गुटेरस बोले-जलवायु संकट बिगड़ रहा
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस ने कहा कि वे गर्म होती धरती पर शीघ्र कार्रवाई करें क्योंकि जलवायु संकट नाटकीय रूप से बिगड़ रहा है। 2015 में, ऐतिहासिक पेरिस समझौते के हिस्से के रूप में, दुनिया के देश पूर्व-औद्योगिक काल से वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक सीमित करने की कोशिशों पर सहमत हुए। 1800 के दशक के मध्य से यह पहले ही लगभग 1.1 डिग्री सेंटीग्रेड गर्म हो चुका है।
हम असफल हो रहे हैं : अल गोर
संयुक्त राष्ट्र की अपनी तरह की पहली रिपोर्ट में परिवर्तन पर इतना जोर दिया गया कि इसमें 47 पृष्ठों में 50 से अधिक बार ‘परिवर्तन’ शब्द की विविधताओं का उपयोग किया गया। वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट में अंतरराष्ट्रीय जलवायु पहल निदेशक डेविड वास्को ने कहा, रिपोर्ट वास्तव में सिस्टम के उस तरह के परिवर्तन पर प्रकाश डालती है, जिसे करने की आवश्यकता है। पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल गोर ने कहा, यह रिपोर्ट दिखाती है कि हम असफल हो रहे हैं। इसलिए नहीं, क्योंकि हम उत्तर नहीं जानते, बल्कि इसलिए कि हम अपना होमवर्क नहीं कर रहे हैं।