बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की भूक्षरण के खिलाफ चल रहे अभियान का मुखिया इस समय भारत है। पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को इसी सप्ताह कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज का अध्यक्ष चुना गया है और वह अगले दो साल तक इस संगठन के अध्यक्ष रहेंगे।
उत्तर भारत की नहीं वैश्विक समस्या हैं धूल भरे तूफान
थियॉ ने पिछले साल उत्तर भारत में चली धूल भरी आंधियों के कारण 125 लोगों के मरने और 200 से ज्यादा के घायल होने का हवाला देते हुए कहा कि यह अकेले इस क्षेत्र की समस्या नहीं है। उन्होंने कहा, भूमि का मानव स्वास्थ्य से नजदीकी संबंध है। रेत और धूल भरे तूफान विश्व के बहुत सारे हिस्सों में गंभीर स्वास्थ्य चिंता का कारण हैं। उन्होंने कहा, करीब 151 देश लगातार भूक्षरण के कारण इस समस्या से पीड़ित हैं।
भूक्षरण है खतरनाक
- 25 देशों ने पिछले साल भयानक सूखे के कारण आपातकाल घोषित किया
- 70 देश औसतन हर साल सूखे के प्रकोप से पीड़ित हो रहे हैं
- 10 से 17 फीसदी वैश्विक जीडीपी को नुकसान पहुंचा रहा है मरुस्थलीकरण
- 70 करोड़ लोग भूक्षरण के कारण 2050 तक होंगे अपनी जगह से विस्थापित