संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस तीन दिवसीय यात्रा पर आज भारत पहुंचेंगे। यह उनके दूसरे कार्यकाल की पहली भारत यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय ने उनकी इस यात्रा के बारे में जानकारी दी है। मंत्रालय ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख 18 से 20 सितंबर तक भारत की यात्रा पर होंगे। उन्होंने जनवरी 2022 में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया था। इससे पहले उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में अक्तूबर, 2018 में भारत की चार दिवसीय यात्रा की थी।
विदेश मंत्रालय ने उनकी इस यात्रा के बारे में बताया कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई के ताजमहल पैलेस होटल में 26/11 आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देकर करेंगे। इसके बाद वे आईआईटी मुंबई में “इंडिया@75: यूएन-इंडिया पार्टनरशिप: स्ट्रेंथनिंग साउथ-साउथ कोऑपरेशन” विषय पर अपना संबोधन देंगे।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि एंटोनियो गुटेरेस अपनी भारत यात्रा के क्रम में 20 अक्तूबर को गुजरात का दौरा भी करेंगे। वह गुजरात के केवड़िया में एकता नगर में मिशन लाइफ पुस्तिका, लोगो और उसकी टैगलाइन के लॉन्च कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी भी उनके साथ रहेंगे। गौरतलब है कि मिशन LIFE की अवधारणा को पीएम मोदी द्वारा COP26 के दौरान ग्लासगो में पेश किया गया था। विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि इसके अलावा वह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पहुंचकर सरदार पटेल को नमन भी कर सकते हैं। यहां वह मोढ़ेरा का भी दौरा कर सकते हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि मिशन LIFE संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर जलवायु कार्रवाई और सतत विकास लक्ष्यों की प्रारंभिक उपलब्धि को प्रदर्शित करने के लिए भारत की पहल है। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के भारत दौरे के दौरान वैश्विक चिंता के मुद्दों पर विदेश मंत्री एस जयशंकर उनके साथ चर्चा करेंगे। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत के संबंधों को और गहरा करने पर भी कदम उठाए जाएंगे। इनमें भारत द्वारा आगामी जी-20 की अध्यक्षता और बहुपक्षवाद में जरूरी सुधार शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार, विदेश मंत्री (ईएएम) एस जयशंकर वैश्विक चिंता के मुद्दों पर यूएनएसजी के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे, संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत के जुड़ाव को गहरा करने के लिए कदम उठाएंगे, जिसमें भारत की आगामी जी20 अध्यक्षता और बहुपक्षवाद में सुधार शामिल है।
युद्ध के समाधान की हर कोशिश का स्वागत करेंगे: महासचिव गुटेरेस
विश्व निकाय के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस टिप्पणी का समर्थन किया है कि यह ‘युद्ध का युग’ नहीं है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यूक्रेन युद्ध के समाधान के लिए हालात बनाने की दिशा में कोशिशों का स्वागत किया जाएगा। अपनी भारत यात्रा से पहले गुटेरेस ने कहा कि वह यूक्रेन में युद्ध बढ़ने से बेहद चिंतित हैं।
बता दें कि मोदी ने समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर सितंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा था कि यह वक्त युद्ध का नहीं है। मोदी ने यूक्रेन में शत्रुता की शीघ्र समाप्ति का आह्वान करते हुए ‘लोकतंत्र, संवाद और कूटनीति’ के महत्व को रेखांकित किया था। गुटेरेस ने भारत दौरे से ठीक पहले कहा कि पीएम मोदी ने जो रूसी राष्ट्रपति से कहा कि यह युद्ध का समय नहीं है, मेरे ख्याल से बिल्कुल सच है। कोई समय, युद्ध का समय नहीं है। लेकिन यह वक्त विशेष रूप से युद्ध का वक्त नहीं है। अतः मैं इसका पूर्ण समर्थन करता हूं।
जब गुटेरस से पूछा गया कि क्या उनकी यात्रा में भारतीय नेतृत्व से यूक्रेन युद्ध पर चर्चा हो सकती है? तो उन्होंने कहा कि मैं विवादित मुद्दों पर सार्वजनिक तौर पर बयान देने वाली कूटनीति में विश्वास नहीं करता हूं।
भारत की अध्यक्षता में जी-20 ऋण पुनर्गठन प्रणाली बनाने की उम्मीद
एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि इस बात की पूरी उम्मीद है कि भारत की अध्यक्षता में जी-20 ऋण पुनर्गठन की प्रभावी प्रणाली बनाएगा। उन्होंने साथ ही चेताया कि महामारी और यूक्रेन संघर्ष के कारण महंगाई बढ़ने से विकासशील देश एक वास्तविक तूफान का सामना कर रहे हैं। बता दें, भारत एक दिसंबर, 2022 से 30 नवंबर, 2023 तक एक साल के लिए जी-20 की अध्यक्षता करेगा। गुटेरस ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और वित्तीय प्रणाली में सुधारों की जरूरत के लिए बहुत दृढ़ता से वकालत कर रहे हैं, जिसे काफी हद तक अमीरों द्वारा अमीरों के लिए बनाया गया था।
भारत की यात्रा से पहले उन्होंने कहा कि वह वैश्विक बहुपक्षीय संस्थानों में भारत की भूमिका मजबूत करने के अपने महत्वपूर्ण संदेश के साथ वहां जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वहां के लोगों के साथ एकजुटता का संदेश लेकर जा रहे हैं। मैं इस विचार का समर्थक हूं कि यदि हम बहुध्रुवीय विश्व में प्रवेश करेंगे, तब हमारे पास अधिक शांति और न्याय होगा। सिर्फ सच्ची बहुध्रुवीयता के साथ हम लोकतंत्रिक, बहुपक्षीय शासन दे सकेंगे।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज हम ऐसे विश्व में रह रहे हैं, जो टकरावों से भरा हुआ है। जहां असमानता काफी बढ़ रही है। मानव ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी हैं कि जलवायु परिवर्तन की समस्या पैदा हो गई है। हमारी धरती को खतरा पैदा हो गया है।