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Russia-Ukraine Crisis: भारत के उपभोक्ताओं पर इसका असर क्या, नई दिल्ली चिंता में क्यों?

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 15 Feb 2022 02:41 PM IST

सार

यह गतिरोध भारत में तेल की कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ महंगाई को भी ऊंचाई पर ले जा सकता है। इसकी वजह से ऊर्जा क्षेत्र में भी  अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है।
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यूक्रेन और रूस के बीच तनाव - फोटो : Agency
यूक्रेन की सीमा पर रूस ने बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती कर दी है। इससे यूक्रेन पर लगातार युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। यूक्रेन पर जंग के खतरे को देखते हुए अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य संगठन नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) ने भी पूर्वी यूरोप में गतिविधियां तेज कर दी है। जानकारों का मानना है कि रूस और यूक्रेन के बीच इस तनाव का असर विश्व स्तर पर भी देखा जा रहा है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। नई दिल्ली की सबसे बड़ी चिंताएं यहीं हैं कि यदि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी रूस के खिलाफ हो जाते हैं और रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ जाता है तो पूरी दुनिया समेत भारत के लिए भी आर्थिक और सुरक्षा परेशानियां बढ़ेंगी। भारत के उपभोक्ताओं पर इसका गहरा असर पड़ने की संभावना है। 

भारत के उपभोक्ताओं पर असर क्या? 
वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।  यूरोप लगभग एक तिहाई गैस के लिए रूस पर निर्भर रहता है। यूरोप को चिंता है कि अगर रूस गैस और तेल की आपूर्ति बंद कर देगा, तो इससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ेंगी। माना जा रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच यदि जंग की नौबत आई तो पश्चिम देश रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा सकते हैं और रूस यूरोप में गैस की आपूर्ति में कटौती कर सकता है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पडे़गा। 


कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि जंग के हालात में रूस चीन के साथ तेल और गैस बेचने की बात कर सकता है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित होगा और भारत में भी तेल की कीमतों पर इसका असर देखा जा सकता है। कहा जा रहा है कि अपने आर्थिक हितों को देखते हुए रूस चीन के साथ अपनी नजदीकी बढ़ा सकता है और भारत के साथ संबंधों की परवाह नहीं भी कर सकता है। 
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यूक्रेन और रूस के बीच तनाव - फोटो : Agency
यूक्रेन की सीमा पर रूस ने बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती कर दी है। इससे यूक्रेन पर लगातार युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। यूक्रेन पर जंग के खतरे को देखते हुए अमेरिका की अगुवाई वाले सैन्य संगठन नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) ने भी पूर्वी यूरोप में गतिविधियां तेज कर दी है। जानकारों का मानना है कि रूस और यूक्रेन के बीच इस तनाव का असर विश्व स्तर पर भी देखा जा रहा है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। नई दिल्ली की सबसे बड़ी चिंताएं यहीं हैं कि यदि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी रूस के खिलाफ हो जाते हैं और रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ जाता है तो पूरी दुनिया समेत भारत के लिए भी आर्थिक और सुरक्षा परेशानियां बढ़ेंगी। भारत के उपभोक्ताओं पर इसका गहरा असर पड़ने की संभावना है। 

भारत के उपभोक्ताओं पर असर क्या? 
वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।  यूरोप लगभग एक तिहाई गैस के लिए रूस पर निर्भर रहता है। यूरोप को चिंता है कि अगर रूस गैस और तेल की आपूर्ति बंद कर देगा, तो इससे ऊर्जा की कीमतें बढ़ेंगी। माना जा रहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच यदि जंग की नौबत आई तो पश्चिम देश रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा सकते हैं और रूस यूरोप में गैस की आपूर्ति में कटौती कर सकता है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पडे़गा। 

कुछ विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि जंग के हालात में रूस चीन के साथ तेल और गैस बेचने की बात कर सकता है, जिससे वैश्विक बाजार प्रभावित होगा और भारत में भी तेल की कीमतों पर इसका असर देखा जा सकता है। कहा जा रहा है कि अपने आर्थिक हितों को देखते हुए रूस चीन के साथ अपनी नजदीकी बढ़ा सकता है और भारत के साथ संबंधों की परवाह नहीं भी कर सकता है। 

पेट्रोल-डीजल के दाम - फोटो : अमर उजाला
तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ सकती हैं
पहले से ही तनाव के कारण पिछले एक महीने में तेल की कीमतें 14 फीसदी तक बढ़ गई हैं। 14 फरवरी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। रूस-यूक्रेन संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पिछले सात सालों में पहली बार 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस विवाद का कोई समाधान नहीं निकलता है तो कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच सकती है। रूस के बजट में करीब 40 फीसदी रेवेन्यू अकेले तेल से आता है। आईआईएफएल सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष, शोध अनुज गुप्ता  के एक बयान के मुताबिक हम बहुत जल्द कीमतें 100 डालर प्रति बैरल तक जाने की उम्मीद कर रहे हैं।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) तपन पटेल ने अपने एक बयान में कहा 'रूस के यूक्रेन पर आक्रमण की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की तेज खरीदारी देखी गई। इस तरह का हमला अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंधों को बढ़ा सकता है, जिससे रूसी निर्यात बाधित हो सकता है।'

पेट्रोल डीजल के दाम। - फोटो : PTI
महंगाई और बढ़ेगी
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है। आंकड़ों के मुताबिक देश के कुल आयात का 20 फीसदी कच्चे तेल पर खर्च होता है। हम अपनी आवश्यकता का लगभग 50 फीसदी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलएनजी) कतर और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से मंगाते हैं। यदि संकट बढ़ा तो यूरोप ओपन मार्केट से तेल खरीदने को बाध्य होगा, जो हर तरह से भारत समेत दुनिया भर में तेल की कीमतों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालेगा। भारत में हीटिंग, बिजली, दवा और उर्वरक जैसी चीजों के निर्माण के लिए एलएनजी का इस्तेमाल होता है। इन सब की कीमतें बढ़ सकती हैं।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ सी राजामोहन ने हाल ही में एक अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा "अगर रूस रूस-यूक्रेन की जंग से तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और महंगाई अपने चरम पर पहुंच जाएगी।'

हालांकि देश के पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव की वजह से पिछले तीन महीने से देश में तेल की कीमतें नहीं बढ़ीं हैं लेकिन माना जा रहा है कि रूस-यूक्रेन विवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में काफी इजाफा हो सकता है, जिससे देश में महंगाई और बढ़ेगी। इसका सीधा प्रभाव रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे अनाज, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ सकता है।

भारत और रूस के रक्षा मंत्री - फोटो : सोशल मीडिया
पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ने का प्रभाव क्या?
जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम अब नहीं बढ़ाए तो इसका सरकारी खजाने पर बोझ पड़ने लगेगा। दरअसल भारतीय अर्थव्यवस्था पेट्रोल-डीजल की कीमतों से काफी प्रभावित होती है। ऐसे में जैसे ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाता है और इसका सबसे जल्दी और तुरंत प्रभाव उन वस्तुओं पर पड़ता है जिसका उपभोक्ता रोजाना इस्तेमाल करते हैं, जैसे  अनाज, सब्जियां, फल, दूध और दवाईयां। 

सुरक्षा मोर्चे पर क्या? 
संकट ठीक उसी समय आया है जब भारत रूस से रूसी S-400 मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ सी राजामोहन के हाल ही में एक अखबार को दिए इंटरव्यू के मुताबिक अगर रूस के खिलाफ गंभीर प्रतिबंध लगते हैं और अमेरिका, भारत को मिली छूट को रोक देता है तो इससे भारत-रूस के बीच S-400 डील पर प्रभाव पड़ेगा। 

कुछ जानकार यह भी मानते हैं कि यदि यूक्रेन संकट के बीच अगर रूस चीन के करीब जाता है तो चीन रूस पर यह दबाव बना सकता है कि वो भारत को की जाने वाली सैन्य सप्लाई रोके। स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की करीब 60 फीसदी सैन्य आपूर्ति रूस से होती है और भारत के लिए इसे नजरअंदाज करना मुश्किल है।
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