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'दूसरों के लिए होंगे चोर, हमारे लिए तो मसीहा है'

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उजाला उर्फ इरफान की मां - फोटो : BBC
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दिल्ली और आसपास के इलाकों में हो रही डकैतियों के आरोप में गिरफ्तार उजाला यानी मोहम्मद इरफान को उसके गांव के लोग मसीहा मानते हैं। उजाला उर्फ इरफान उर्फ आर्यन खन्ना को दिल्ली पुलिस ने 5 जुलाई को बिहार के सीतामढ़ी के एक होटल से गिरफ्तार किया था। महंगी गाड़ियों के शौकीन उजाला के बारे में ये खबर भी सामने आई थी कि वो अमीरों से लूटे पैसे से अपने गांव के गरीबों की मदद करता था।
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गांव की रामसती कहती हैं, "दूसरे आदमी के लिए चोर होंगे, हमारे लिए तो मसीहा हैं। बीमारी हो या शादी ब्याह, सभी में तो उजाला ने मदद की।" रामसती ने जब ये कहा तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उनके बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए उजाला ने उसे 10 हजार रुपये दो साल पहले दिए थे। उजाला के मुस्लिम बहुल गांव जोगिया में केवल चार हिंदू परिवार रहता है। वहां के जोगिन्दर राम की भी उजाला ने मदद की है।

उजाला ने तीन महीने पहले ही जोगिन्दर की बेटी की शादी में 4 हज़ार रुपये से मदद की तो कुछ साल पहले लीवर इन्फेक्शन के ऑपरेशन के लिए उसे 5 हज़ार रुपये दिए थे। जोगिन्दर के घर में उजाला की गिरफ्तारी के बाद से मायूसी छाई है। मोहम्मद इरफान उर्फ उजाला के घर में सन्नाटा पसरा है। जहां उसकी 65 साल की मां नसीमा खातून, भाभी गिन्नी खातून और उजाला की पहली पत्नी से हुई दो बेटियां हैं। उजाला की कमाई का अक्स उसके घर में दिखता है जहां मुख्य द्वार से बैठक खाने तक टाइल्स लगी है।
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उजाला उर्फ इरफान का गांव - फोटो : BBC
उजाला की बच्चियां पुपरी के किड्स जोन नामक स्कूल में पढ़ते हैं। उजाला की मां ने कहा, "मेरे बेटे को नजर लग गई है। उसे फंसाया गया है। गांव के आदमी ने तो नहीं लेकिन बाहर के आदमी ने दुश्मनी निकाली है। उसने तो सब अच्छा काम किया है अब आगे अल्लाह जाने क्या होगा।" वहीं उजाला की भाभी गिन्नी खातून कहती हैं, "यहां आए तो हमेशा सलीके से रहे बाकी बाहर जाकर क्या किए नहीं मालूम।" दिलचस्प है कि उजाला के बारे में "कुछ नहीं मालूम" कहने वाले गांव में बहुत सारे लोग मिल जाएंगे।

गाढ़ा पंचायत जिसके अंदर जोगिया गांव आता है उसके सरपंच प्रतिनिधि मोहम्मद मोदस्सीर कहते हैं, "आज चाहे कोई मुंह न खोले लेकिन उजाला को जब मालूम चला कि गांव में किसी के ऊपर आफत आई तो उसने बिना किसी को बताए दानवीर की तरह मदद की।"

गौरतलब है कि उजाला का परिवार पहले बहुत गरीब था। पिता खेती मजदूरी किया करते थे और साल 2000 में उनकी मौत हो गई। उजाला 10 साल की उम्र में ही मुंबई चला गया। घर में उजाला के अलावा दो भाई और दो बहनें हैं। पंचायत समिति सदस्य शौकत अली बताते हैं, "उसके बारे में यही जानकारी हमें थी कि वो मुंबई, हैदराबाद, कानपुर, दिल्ली कई जगह रहा और बैग बनाने का बिजनेस किया। हालांकि बाद में 2012 में जब वो घर आया तो कुछ लोगों ने ये भी कहा कि वो मुंबई में बियर बार चलाता है।"
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उजाला उर्फ मोहम्मद इरफान का कमरा - फोटो : BBC
स्थानीय पत्रकार राकेश श्रीवास्तव ने बताया, "2012 में पहली बार उजाला खबरों में आया जब उसने दरभंगा में जाले में एक नाचने वाली पर लाखों रुपये उड़ाए। बाद में 2013 में कानपुर पुलिस उसे 30 लाख के ज्वेलरी की चोरी के मामले में गिरफ्तार करने आई तो उजाला पुपरी थाना से भाग गया। फिर वो 2014 में चुनाव के दौरान अपनी महंगी गाड़ी में 4 लाख रुपये के साथ पकड़ा गया था।"

बीती 5 जुलाई को उजाला की गिरफ्तारी के बाद जोगिया और इसके आसपास के 6 लोगों को नोटिस दिया गया है। तब से इलाके में दहशत है। उजाला ने दो शादियां कीं, दोनों ही प्रेम विवाह। पहली शादी उसने सीतामढ़ी में जबकि दूसरी हिंदू भोजपुरी एक्ट्रेस से की। उजाला की मां नसीमा खातून बताती है, "उसने दोनों शादियां बाहर बाहर ही कर ली। पहली वाली तो जोगिया में कुछ दिन रही भी लेकिन दूसरी वाली कभी घर नहीं आई है, इसलिए आज तक नहीं देखा। बाकी जान लीजिए, इस घर के अलावा गांव में एक धुर जमीन तक उसकी नहीं है।"

जोगिया गांव के लोग उसके किस्से दबी जुबां में बतियाते हैं लेकिन खुलकर कम लोग ही सामने आते हैं। केरल में काम करने वाले मोहम्मद नजीर कहते है, "शरीफ था लेकिन गांव के बाहर जाकर क्या करता था, क्या मालूम।" हालांकि दिलचस्प है कि सबसे ज्यादा मायूसी गांव के चार हिंदू परिवारों में है। जैसा रामसती कहती भी है, "हम चार ही तो सबसे गरीब परिवार है यहां। अब उजाला चला गया तो जाने कौन देखभाल करेगा।"
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