भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने मंगलवार को कहा कि जब तक कोई व्यक्ति बायोमेट्रिक ब्योरा नहीं देता है, कोई भी परिचालक आधार नहीं बना सकता या उसे अपडेट नहीं कर सकता। प्राधिकरण ने रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया कि आधार साफ्टवेयर को कथित रूप से ‘हैक’ किया गया है।
एक आधिकारिक बयान में यूआईडीएआई ने जोर देकर कहा कि उसकी प्रणाली में कोई भी सेंध नहीं लगा सकता। प्राधिकरण ने साफ्टवेयर और आईडी आंकड़ों के साथ कथित तौर पर किसी प्रकार के समझौते की बातों को एकदम से खारिज कर दिया। उसने कहा कि इस प्रकार के दावों में कोई सचाई नहीं है और पूरी तरह आधारहीन है।
आधार पंजीकरण साफ्टवेयर को कथित रूप से ‘हैक’ करने की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए प्राधिकरण ने दावा कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व जानबूझकर लोगों के मन में भ्रम फैला रहे हैं जो पूरी तरह अवांछित है। यूआईडीएआई ने कहा कि उसने लोगों के आंकड़ों की पूर्ण सुरक्षा को लेकर जरूरी सुरक्षात्मक कदम उठाये हैं।
प्राधिकरण ने यह भी साफ किया कि कोई भी परिचालक आधार तब तक नहीं बना सकता है, अपडेट नहीं कर सकता जब तक कोई व्यक्ति स्वयं बायोमेट्रिक सूचना नहीं दे। पंजीकरण और अपडेट प्रक्रिया के लिये कड़े नियमों का पालन किया जाता है। यूआईडीएआई ने कहा, ‘‘इसीलिए आधार डेटाबेस में ऐसे पंजीकरण कोई संभावना नहीं है जो मौजूद ही नहीं है।’’
इनपुट: भाषा